रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के साथ परमाणु संधि से किनारा कर लिया है। पुतिन ने कहा कि रूस उस संधि में अपनी भागीदारी सस्पेंड कर रहा है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के विस्तार पर रोक लगाना है। मालूम हो कि ‘न्यू स्टार्ट’ (नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि) संधि पर 2010 में रूस और अमेरिका ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि दोनों देशों की ओर से तैनात किए जा सकने वाले लंबी दूरी के परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करती है। इसमें परमाणु हथियार ले जाने में समक्ष मिसाइल के उपयोग पर भी रोक की बात शामिल थी।
राष्ट्रपति पुतिन ने मंगलवार को अपने संबोधन में कहा कि रूस अभी संधि से पूरी तरह से नहीं हट रहा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका परमाणु हथियार परीक्षण फिर से शुरू करता है, तो रूस को भी ऐसा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। पुतिन ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पश्चिमी देशों की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह वे (देश) हैं, जिन्होंने युद्ध शुरू किया और हम इसे खत्म करने के लिए बल प्रयोग कर रहे हैं।
पुतिन बोले- युद्ध के मैदान में रूस को हराना असंभव
राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिमी देश जानते हैं कि युद्ध के मैदान में रूस को हराना असंभव है, इसलिए उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके दुष्प्रचार हमले शुरू किए। रूसी संस्कृति, धर्म और मूल्यों पर हमला किया। युद्ध को जायज बताते हुए पुतिन ने दावा किया कि उनकी सेना यूक्रेन के क्षेत्रों में नागरिकों की रक्षा कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम लोगों के जीवन, अपने घर की रक्षा कर रहे हैं। पश्चिम वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
पुतिन ने पश्चिम पर गलत खबरें फैलाने का लगाया आरोप
पश्चिमी देशों पर रूस को धमकाने का आरोप लगाकर पुतिन ने अक्सर यूक्रेन पर अपने आक्रमण को सही ठहराया है। वहीं, पश्चिमी देशों का कहना है कि रूस की सेना ने यूक्रेन पर अकारण हमला किया। व्लादिमीर पुतिन के संबोधन का रूस के सभी सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारण किया गया। संविधान में प्रावधान है कि राष्ट्रपति हर साल देश को संबोधित करेंगे। हालांकि, पुतिन ने 2022 में एक बार के अलावा कभी संबोधित नहीं किया, जब उनके सैनिकों ने यूक्रेन पर हमला किया। यह संबोधन ऐसे वक्त हुआ है, जब शुक्रवार को यूक्रेन युद्ध के एक साल हो जाएंगे।
