जहां एक ओर पूर्णिमा तिथि से एक दिन पहले होलिका दहन करते हैं तो वहीं, दूसरे दिन होली खेली जाती है. इसके अलावा, होली वाले दिन दही से बनी चीजों का भी बहुत महत्व माना जाता है. ऐसा कहते हैं कि होली के दिन दही से ही घर में व्यंजन बनाने चाहिए और उन्हीं व्यंजनों का भोग भगवान को लगाना चाहिए. इसलिए अधिकतर घरों में होली के दिन दही बड़ा, कढ़ी, दही रायता ये सभी चीजें बनती ही है.

ऐसे में आइये जानते हैं कि आखिर होली के दिन दही से बनी चीजों का क्यों माना जाता है इतना महत्व.
- होली का पर्व फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने संपूर्ण तेज के साथ चमकते हैं. चंद्रमा की शक्तियां भी पूर्णिमा के दिन अपने चरम पर होती हैं. इस दिन चंद्रमा का प्रभाव भी अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा नजर आता है.
- चंद्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का कारक माना गया है. चंद्रमा का नाता सफेद वस्तुओं से होता है. दूध, दही, मक्खन आदि चीजें चंद्रमा को मजबूत बनाने का काम करती हैं. कुंडली में अगर चंद्रमा मजबूत हो तो व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति मिल जाती है.

इसी कारण से होली के दिन दही से बनी चीजों का बहुत महत्व माना जाता है. दही या दही से बनी चीजों को होली के दिन बनाने से और उसका भगवान को भोग लगाने से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और अपनी शुभता व्यक्ति और उसके परिवार पर बनाए रखते हैं. होली के दिन दही से बनी चीजों का भगवान को भोग लगाने और स्वयं सेवन करने से जीवन में सकारात्मक प्रभाव नजर आने लगते हैं, चंद्रमा के प्रभाव से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और अकेलेपन, घबराहट, तनाव आदि भावों से छुटकारा मिल जाता है.
