**गौ सेवा से प्रेत मुक्ति की कथा
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भारतीय जनमानस गाय को बहुत ही पवित्र एवं माँ सामान मानता है। वेदों में, पुराणों में, तथा कई अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों में गाय एवं गौ सेवा का वर्णन हुआ है। गौ सेवा का महात्म्य अपरम्पार है। लगभग पचहत्तर वर्ष पूर्व की एक घटना है। पूर्वी बंगाल (आज का बांग्लादेश) में एक व्यक्ति थे, विशेन भट्टाचार्जी।
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उस समय विशेन बाबू ने बहुत ही कम मूल्य पर अपने यहाँ एक जूट प्रेस खरीदा, जिस के संबंध में एक ऐसी अशुभ बात प्रसिद्ध थी कि जो भी व्यक्ति वह प्रेस खरीदेगा, उस को कोई आर्थिक लाभ तो होगा नहीं, साथ ही उस को लेते ही उसका या उसके परिवार में किसी का कुछ अमंगल भी हो जाएगा।
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विशेन बाबू इन सब बातों में विश्वास नहीं रखते थे, जो मन में ठान लिया उसे कर के छोड़ते थे। लेकिन उस प्रेस के अभिशप्त होने वाली बात तो सत्य थी। न जाने किसका साया था उस मशीन पर। फिर भी इतनी बड़ी संपत्ति इतने कम मूल्य में मिल रही थी, यही सोचकर उन्होंने वह प्रेस खरीद लिया। लेकिन परिवार में जिसने सुना माथा ठोक लिया।
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परिवार के सभी सदस्यों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए आखिरकार विशेन बाबू ने उसे अपनी कार्यशाला में मंगा ही लिया। लेकिन उस मशीन के आते ही मानो उनके घर में दुर्भाग्य ने पैर जमा लिया। प्रेस लेने के बाद कई प्रकार की शारीरिक, आर्थिक विपत्तियां उनके घर में आयीं। विशेन बाबू पर भारी कर्जा भी हो गया।| अब उन्होंने उस मशीन को बेचने का निर्णय कर लिया था। लेकिन कोई खरीददार मिले तब तो।
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उसी दौरान उनके घर पर स्वामी अवधेशानंद जी महाराज आये। जगन्नाथ रथ यात्रा से लौट कर जब स्वामी जी ढाका लौटे तो उन्ही के घर पधारे और उनके यहां ही ठहरे। रात्रि भोजन के बाद उन्होंने स्वामी जी को उपर्युक्त सब बातें बताएं और अगले दिन स्वामी जी को प्रेस दिखाने के लिए भी उस स्थान पर ले गए।
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गंगा नदी के तट पर सुरम्य स्थान पर एक विस्तृत जगह में स्थित उनकी कार्यशाला में उस प्रेस को देखकर स्वामी जी ने कहा कि “तुम्हारे ऊपर भगवान की कृपा है, जो ऐसा स्थान अनायास ही प्राप्त हो गया। अब इसको बेचने का विचार छोड़कर कुछ ऐसा उपाय करो, जिससे इसका अमंगल दूर हो जाए और वह उपाय है गौ सेवा।
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यहां पर यथाशक्ति अच्छी गाय रखो। कुछ गायों का दूध स्वयं अपने उपयोग में ना लाकर उनके बछड़ों को ही पीने दो। प्रेम पूर्वक उनके चारा दाना का इंतजाम करो और स्थान के मध्य में भगवान श्री गोपाल कृष्ण का सुंदर छोटा-सा मंदिर बनवा दो। इस कारखाने के सभी अमंगल स्वयं दूर हो जाएंगे”। विशेन बाबू को स्वामी जी की बातों पर अखंड विश्वास था।
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जैसा निर्देश उन्हें स्वामी जी ने दिया उन्होंने भक्ति-भाव से ठीक वैसा ही किया। भगवत कृपा और गो सेवा से जो कारखाना भुतहा प्रेस के नाम से प्रसिद्ध था उस में सुख शांति और समृद्धि का निवास हो गया। पहले जो लोग उसमें काम करने को तैयार नहीं थे, औऱ कहा करते थे कि उनकी मशीनों को रात्रि में भूत चलाते हैं; उसी स्थान पर गो सेवा के प्रभाव से नई नई मशीनें लगने लगी और वह कारखाना, एक बड़ी फैक्ट्री के रूप में परिवर्तित हो गया। विशेन बाबू को यह सब कुछ एक चमत्कार से कम नहीं लग रहा था।
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हमारे यहाँ (सनातन धर्म में) ऐसी मान्यता है कि ‘गीता, गंगा, गायत्री, गया (श्राद्ध) एवं गोसेवा से निश्चित प्रेत तत्व से मुक्ति मिलती है। ऐसा शास्त्रों में भी कहा गया है और यह घटना इसका प्रमाण भी है। आज भी यदि श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ ऐसे कार्य में गीता पाठ, गायत्री जाप, गंगा स्नान, गया श्राद्ध और गो सेवा की जाए तो निश्चय ही मुक्ति मिलती है। किंतु यह सब शुद्ध, सदाचारी एवं निःस्वार्थ भाव वाले व्यक्तियों द्वारा होना चाहिए।
हर हर महादेव जय बाबा विश्वनाथ भगवान् की जय
