रायपुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर में हुए करोडो के घोटाले की परते खुलने लगी है। बैंक में कार्यरत कर्मियों ने ही बैंक के इंटरनल खाते में करोडो रुपये की धोखधड़ी किया था। पुलिस ने बैंक के प्रतिवेदन पर सहायक लेखापाल संजय शर्मा और अरुण बैसवाड़े व कनिष्ट लिपिक चंद्रशेखर डग्गर पर धारा 420, 409 और 34 बी अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस ने एफआईआर के बाद जाँच प्रारम्भ की तो तीनो ही आरोपित भूमिगत हो गए। पुलिस ने उन्हें पकड़ने उनके निवास और संबंधित स्थानों में छापेमारी की पर तीनो अभी तक पुलिस की पहुंच से दूर है। पुलिस ने अगस्त 2023 में अपराध पंजीबद्ध किया था, उसके आठ महीने बाद भी आरोपितों तक नहीं पहुंच पाई है जबकि तीनो आरोपित लोकल रायपुर निवासी बताये जाते है।
जमानत ख़ारिज-
पुलिस में अपराध दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने चंद्रशेखर डग्गर और अरुण बैसवाड़े ने सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल किया था जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। फिर दोनों ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल किया, तो वहा भी कोर्ट ने दोनों के याचिका ख़ारिज करते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया है। बताते है कि कोर्ट में जिला सहकारी बैंक के विधि प्रकोष्ट ने आरोपितों के जमानत का विरोध किया था, जिसके बाद कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है।
शाखा प्रबंधको और पासिंग अफसर की तलाश-
बैंक के भीतर विगत पांच वर्षो से गबन का खेल चलता रहा। बैंक की कुर्सी में बैठकर आरोपित सरकारी धन में सेंधमारी करते रहे और बैंक प्रबंधन अंजान रहा। इस पूरे घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक इजेक्सन प्रमोद शर्मा और प्रकाश गावरले, तत्कालीन में पासिंग अफसर और बैंक के एक कर्मचारी नेता की भूमिका भी संदिग्ध है। सीओडी शाखा प्रबंधक शरद चंद्र गंगने ने कहा कि
“प्रकरण सज्ञान में आने के बाद पुलिस में अपराध दर्ज कराया गया है, पुलिस जाँच कर रही है ।”
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