रायपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 177560 की चोरी के एक प्रकरण की सुनवाई में कल
5/6/2024। हुआ

अनुसूचित जनजाति आयोग में रेलवे के उच्च पदस्थ अधिकारी पीसी सी एम टी शिवकुमार और डीपीओ राहुल गर्ग तलब किए गए दोनों अधिकारियों से आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने प्रकरण में विस्तार से जानकारी मांगी और सवाल जवाब की जिसमें अधिकांश उत्तर निरुत्तर रहे लिहाजा आयोग ने अधिकारियों को एक माह का समय दिया है और कहां है की चोरी के इस प्रकरण की समस्त प्रमाणिक दस्तावेज के साथ जानकारी एक माह के भीतर प्रस्तुत करें अन्यथा आयोग आवश्यक कदम उठाएगी
अध्यक्ष ने लगाई फटकार एक माह के भीतर प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की दिए आदेश
बता दे की यह मामला 10 साल से अधिक पुराना मामला है इसमें 30 सितंबर 2013 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के आरक्षण कार्यालय में पदस्थ रिजर्वेशन क्लर्क कल्पना कृष्ण स्वामी को 177560 चोरी का आरोप लगाकर रेलवे अधिकारियों ने रेलवे कोर्ट में प्रस्तुत किया इससे पहले क्लर्क से कहा गया की नौकरी बचाना है तो उक्त रकम जमा करो लिहाजा हड़बड़ाहट में महिला क्लर्क कल्पना कृष्ण स्वामी ने रेलवे की लंबी नौकरी और सेवा को ध्यान में रखते हुए स्वयं की सुरक्षा के खातिर अपने परिचित एक अंकल मोहम्मद नजीर इमाम से संपर्क किया और मदद मांगी महिला ने संपूर्ण घटना की जानकारी देते हुए तत्काल रकम लेकर आरक्षण कार्यालय पहुंचने की बात कही अलबत्ता अंकल मोहम्मद नजीर रकम 177560 लेकर आरक्षण कार्यालय पहुंचे यहां पर पहले से तैयार एक साजिश के तहत अधिकारियों ने अंकल मोहम्मद नजीर और महिला क्लर्क दोनों को रकम के साथ गिरफ्तार कर लिया और यह बताया यह चोरी की रकम है जिसे बरामद किया जा रहा है उसके पश्चात दोनों को अपराधी बनाकर रेलवे कोर्ट में पेश किया गया जहां से जेल दाखिल कर दिया गया यहां पर यह बताना लाजिमी है कि जिस दिन यह पूरी घटना घटी उसे दिन इलाज की एक पर्ची पॉलिथीन में लेकर महिला कर्मचारी आरक्षण कार्यालय पहुंची थी उसे मालूम ही नहीं था कि उसके पीछे क्या षड्यंत्र रच दिया गया है इससे पहले की समझदारी दिखाई सारी घटना तत्काल में घटित कर दी गई जबकि वहां पर पहले से एक अन्य महिला कर्मचारी पदमा ज्योति अधिराज मौजूद थे ऑन ड्यूटी गिरफ्तारी से महिला कर्मचारी कल्पना कृष्ण स्वामी को जोरदार झटका लगा वह समझ नहीं पा रही थी की क्या हुआ है क्योंकि इसमें महिला कर्मचारी पदमा ज्योति और किरण कुमार पाणिग्रही आदि की भी मौजूदगी थी जो इस षड्यंत्र के हिस्सा हैं तहकीकात के दौरान यह भी बात सामने आई कि जिस रकम को चोरी का बताया गया उसमें कहीं ना कहीं महिला क्लर्क पदमा ज्योति और किरण कुमार पाणिग्रही की भी भूमिका संदिग्ध है जीआरपी पुलिस रेलवे प्रशासन कि इस षडयंत्र पूर्वक कार्रवाई में एक महिला कर्मचारी काफी प्रताड़ित हुई है यहां तक की रेलवे कोर्ट सेशन कोर्ट और जीआरपी पुलिस सभी की उपस्थिति काफी संदिग्ध पूर्ण है हाई कोर्ट ने महिला को मामले में निर्दोष पता कर रिहा करने का आदेश प्रसारित करते हुए कहा है कहीं ना कहीं इस मामले में रेलवे कोर्ट जीआरपी पुलिस और सेशन कोर्ट मानसिक विकृति से ग्रसित होकर फैसला दिया है महिला कर्मचारी को जिस सबूत के आधार पर आरोपी बताया जा रहा है सीसीटीवी फुटेज में पैसा लेते और दिखाई दे रही है ऐसा कहा गया है ऐसा कोई फुटेज ना तो रेलवे कोर्ट के पास है ना तो जीआरपी पुलिस के पास उपलब्ध है और ना ही सेशन कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी उक्त सबूत को पेश नहीं कर पाए हैं इससे स्पष्ट होता है कि महिला को किसी षड्यंत्र का शिकार बनाया गया क्यों बनाया गया यह प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है और यह बताता है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में एक वर्ग खास तरह से कम कर रहा है और अपने इरादों के पूर्ति के लिए निर्दोष कर्मचारियों को शिकार बन रहा है यह खास काम क्या है अदालत पूछ सकती है 13 सितंबर 2023 को महिला कर्मचारियों ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार पर न्याय प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत पेश की उसके साथ कार्रवाई का दौर शुरू हुआ जो निरंतर जारी है जिसमें आज 5 जून 2024 को पेशी थी स्पेसी में रेलवे के उच्च अधिकारी मौजूद हुए जिसमें पीसीएम टी शिवकुमार डीपीओ राहुल गर्ग उपस्थित हुए इन अधिकारियों ने भी आयोग के समक्ष कोई जवाब नहीं प्रस्तुत कर पाए हैं और आयोग ने एक माह का समय दिया है की महिला के ऊपर लगे अपराध के साक्ष्य को पेश करें और यह साबित करें कि उनके द्वारा की गई की गई कार्यवाही ठोस और न्याय संगत रही है से पहले आयोग की तमाम सुनवाई के दौरान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के काफी अधिकारी उपस्थित हुए और सभी के द्वारा जवाब नहीं दिया जा सका है इस मामले में आयोग के निर्देश पर आठ कर्मचारियों अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण अनुसूचित जनजाति थाना में दर्ज किया गया है जिसमें पदमा ज्योति सीआरएस सीनियर डीसीएम विपिन वैष्णव किरण कुमार सीआरसी स्वर्ण सिंह कलसी दी और अधिकारी तथा कुंडल राव पर प्राथमिक का प्रकरण प्रकरण दर्ज हैंमामले में लगभग 13 माह की सजा उक्त क्लर्क केंद्रीय कारागार रायपुर में कटी है 13 महीने की सजा काटने के बाद 29 अक्टूबर 2014 को क्लर्क हाई कोर्ट के आदेश पर जमानत पर रिहा हुई धारा 380 के तहत दर्ज मामले में क्लर्क ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए तमाम सबूत अदालत के समक्ष पेश किया नतीजतन 5 जनवरी 2019 तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को बी बुनियाद पाते हुए क्लार्क को बरी कर दिया उसके बाद से प्रकरण में सुनवाई अनुसूचित जनजाति आयोग शंकर नगर कार्यालय में चल रही है
