सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर (शुक्रवार) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी की पत्नी की संदिग्ध मौत की जांच करने का निर्देश दिया। यह आदेश [मंदाकिनी दीवान एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं अन्य] मामले में पारित किया गया, जिसमें मृतक रंजना दीवान की मां और भाई ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पीबी वराले की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। मृतक की 2016 में मृत्यु हुई थी, जो उनकी शादी के लगभग दो साल बाद हुई। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ पुलिस पर पक्षपात और अनुचित प्रभाव डालने का आरोप लगाया, जिसके बाद उन्होंने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है, ताकि मृतका की मौत की सच्चाई सामने आ सके।
अपीलकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता दिनेश जोतवानी, धवेश पाहुजा, भार्गव बैसोया, श्रुति सिंह, शिवालिका मिधा, नरेंद्र बहादुर तिवारी, नीलेश शर्मा और साकेत गोगिया उपस्थित हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जल्द से जल्द जांच पूरी करने और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता महसूस होती है, तो वह ऐसा कर सकती है और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचा सकती है।

