वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी 11 अगस्त से नियमितीकरण, स्थायीकरण, कार्यभारित आकस्मिकता सेवा निधि नियम लागु करने के तथा अन्य 06 मांगो को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल में बैठे हुए है!

हड़ताली कर्मचारी का कहना है कि नियमितीकरण के मांग कैबिनेट का मामला है जिसमे तत्काल निर्णय नही ले सकते है मंत्री जी तो कमसे कम उनके अधिकार क्षेत्र के जो मांग है कार्यभारित आकस्मिकता निधि सेवा नियम गठन करने का तथा स्थायीकरण के मांग जो उनके अधिकार क्षेत्र में है उसको पुरा करें! कार्यभारित आकस्मिक्ता सेवा नियम गठन करने के बारे में मंत्री जी को दिग भ्रमित किया जा रहा है अधिकारियों के द्वारा जबकी कार्यभारित आकस्मिकता निधि सेवा नियम का गठन केवल वर्क डिपार्टमेंट में ही लागु किया जाता है ! यह सभी विभाग में लागु नही हो सकता है, यह नियम केवल जल संसाधन, पीएचई, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, छात्रावास, कोर्ट जैसे वर्क डिपार्टमेंट है वहां बस लागु होता है और वन विभाग को छोड़कर लागु भी है!
वन विभाग में भी वर्ष 1978 से मध्यप्रदेश शासन काल से लागु है जिसका राजपत्र में भी प्रकाशन है उसके आधार पर ही वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मांग कर रहे है!
छत्तीसगढ़ में भी लागु करते हुए राजपत्र में प्रकाशन करने के लिये उप सचिव छ. ग. शासन वन एवं संस्कृति विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 2439 / व. सं. /2002 रायपुर दिनांक 02/05/2002 के माध्यम से मुद्रित अधिसूचना 100 प्रति में शासकीय क्षेत्रिय मुद्राणालय राजनांदगांव को दिया गया था! जिसके आधार पर अवर सचिव छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 1-6/2004/10-1 रायपुर दिनांक 24.02.2006 के माध्यम से छत्तीसगढ़ वन विभाग कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम गठन सेवा शर्ते नियम 2006 बनाया था जिसका परिपालन विभाग आज तक नही कर पाया है!
उसी मांग का लाभ दिया जाये कहकर वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ विगत 35 दिनों से लगाता अनिश्चित कालीन हड़ताल में बैठे है, और कुछ लोग तो दो दिनों से आमरण अनशन पर भी बैठ गये है!
तीन तीन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी का हृदयघात से निधन भी हो चुका है अनेको दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का स्वास्थ्य खराब हो चुका है लगातार इलाज जारी है! संगठन के पदाधिकारी अब अड़ चुके है कि जब तक अब आकस्मिकता कार्यभारित सेवा नियम लागु नही करेगा, और स्थायीकरण के ये दोनो मांग को पुरा नही करेगा तब तक अब तुता धरना स्थल से नही हटेंगें, भले ही सरकार हमें दो माह और क्यों न बिठा दें!
जब सरकार तैयार नही तो हम लोग भी ये दोनो मांग को पुरा कराये बिना नही हटेंगें, बड़े उद्देश्य के सांथ इस सरकार को लाने में जी जान लगा दिये थे तन मन धन लगाकर सरकार बनाने में काम किया था इस सरकार से अपेक्षा है कि हमारे मांगों को पुरा करें!
अब दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भी अपने मांगो पर अडिग होते हुए नजर आ रहे है ,वन मंत्री जी गुमराह है या किया जा रहा है यह चिंता का विषय है लेकिन संगठन के पदाधिकारी गुमराह में नही है जब जब मंत्री जी से मिले है सचिव से मिले है अधिकारियों से मिले है केवल दो सूत्रिय मांगो के पुरा करने पर जोर दिये है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिये कार्यभारित तथा आकस्मिकता सेवा नियम लागु किया जाये और इनसे जो वंचित हो रहे है येसे लोगों के लिये स्थायीकर्मी बनाकर स्थायीकरण किया जाये यही दोनों मांगो को लेकर मंत्री से चर्चा हुआ था जिस पर सहमती व्यक्त किया गया था,
लेकिन अचानक मंत्री जी का यूटर्न होना समझ से परे जैसा लग रहा है कौन गुमराह कर रहा है समझ से परे है!
कल एक महिला कर्मचारी बेहोस होकर मंच में हि गिर पड़ी तत्काल एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल भिजवाया गया जहां ईलाज जारी है, वहीं दुसरी ओर एक हड़ताली कर्मचारी को रात्रि के समय लगभग चार बजे जहरीले जीव ने काट लिया जिस माना कैंप हास्पिटल में भर्ती किया गया है जहां पर चार से पांच इंजेक्शन लगाया गया है अभी भी वो अस्पताल में भर्ती है! वन मंत्री जी के द्वारा जिस प्रकार से चुप्पी सांधी जा रही है वह उचित नही है, वन मंत्री जी से कभी येसा अपेक्षा नही किया गया था कि वो इस प्रकार से चुप्पी सांध लेगा! यही वन मंत्री है जो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के मंच में जाकर वादा किया है आज सत्ता पाते ही वादा से मुकरने का काम कर रहे है, वन मंत्री जी पिछे ना हटे विपक्ष में रहकर जो मंच में जाकर वादा किया था जिसके वादा और भाषण सुनकर वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों अपने हांथ में गंगाजल लेकर उसी मंच में कसम खाया था कि भाजपा की सरकार बनाने के लिये तन मन धन से सहयोग करेंगें!
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने तो गंगा जल के लाज को रख लिये सरकार बनाकर लेकिन भाजपा सरकार में आने के बाद सत्ता में आने के बाद दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियो को अनदेखा कर रहा है! यह संगठन केवल अपने वन विभाग में जो लागु हो सकता है वही मांग कर रहा है लेकिन अधिकारी मंत्री को भ्रमित कर रहा है कि यह कैबिनेट की मामला है करके, नियमितीकरण कैबिनेट का मामला है लेकिन कार्यभारित व स्थायीकरण विभागिय मामला है जिसे सरकार तत्काल पुरा करें! जिसके पेट में दर्द है वो हड़ताल में है, जिसे भुख है वो हड़ताल में है जिसे पर्याप्त खाने को मिल रहा है वो हड़ताल नही कर रहे है सरकार वन विभाग के हड़ताली दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के बारे में सोंचे मांग पुरा करें !
तुता जैसे धरना स्थल में सबसे लंबा हड़ताल करने वाले है वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी और आमरण अनशन का आज तीसरा दिन भी है, देखना है सरकार क्या कर पाती है, क्या हड़ताली कर्मचारियों से बात चीत कर रास्ता निकालती है या फिर अनदेखा करती है!
