रायपुर शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है इसमें एक निजी विश्वविद्यालय ने बिना अनुमति और लाइसेंस के ड्रोन प्रशिक्षण की तैयारी कर ली
आईटीएम कॉलेज का फर्जीवाड़ा सामने आया
है वही विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित कर लिया है जबकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थी जानकारी से अनभिज्ञ है वही उक्त विश्वविद्यालय का दावा है कि उनके पास सभी तरह के वैधानिक प्रमाण पत्र मौजूद हैं जो की बी बुनियाद पूर्ण है प्रतिदिन राजधानी की टीम ने उक्त विषय में सच्चाई के अंतिम छोर तक जाने की कोशिश की जिसमें. विश्वविद्यालय प्रबंधन की एक प्रमुख अधिकारी से टेलिफोनिक चर्चा की किंतु विषय में प्रति उत्तर नहीं दिया औरकिसी व्यक्ति को अधिकृत बढ़कर संबंध में जाकर फीडबैक लेने के लिए बात कही उक्त अधिकृत 20 सितंबर को दिन भर टीम के सदस्य को गुमराह करते रहा और एक प्रेस नोट के माध्यम से उलझाए रखा जिसमें आधा अधूरा सत्य मौजूद है जो आम लोगों की जानकारी के लिए साझा किया जा रहा है ताकि ऐसी शिक्षा जगत में गतिविधि को रोका जा सकेगौरतलाप है कि आईटीएम विश्वविद्यालय ने पिछले दिनों ड्रोन प्रशिक्षण की लांचिंग की और मीडिया से भी जानकारी को साझा किया इस प्रशिक्षण के शुरुआती अंश में राज्य के वित्त वित्त मंत्री ओपी चौधरी से विश्वविद्यालय कैंपस में ड्रोन प्रशिक्षण विभाग का शुभारंभ कराया गया जबकि वित्त मंत्री इस जानकारी से अनभिज्ञ है कि जिस प्रशिक्षण विभाग की ओपनिंग करने जा रहे हैं उसमें प्रमुख अधिकृत कंपनी से अनुमति नहीं मिल पाई है ऐसे में यह सवाल उठता है कि विश्वविद्यालय ने कि जल्दी बाजी में प्रशिक्षण विभाग की शुरुआत की और द्रोण प्रशिक्षण कक्षा का शुभारंभ वित्त मंत्री से कराया बता दे की आईटीएम विश्वविद्यालय ने एग्री ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के लिए एरीज एग्रो से साझेदारी की बात कह रहा है लेकिन इसके प्रमाण को दिखाई नहीं गया वहीं विश्वविद्यालय राजनीतिक साझेदारी की बात कहता है अब सवाल यह उठता है कि शिक्षण में राजनीतिक साझेदारी किस तरह होती है दूसरा प्रमुख सवाल इस धोखाधड़ी में है कि आईटीएम विश्वविद्यालय ड्रोन प्रशिक्षण के लिए अधिकृत कंपनी डीजीसीए से अनुमति की बात करता है जबकि उसके पास डी जी सीए का लाइसेंस नहीं है इसका उत्तर विश्वविद्यालय प्रबंधन की प्रमुख अधिकारी लक्ष्मी मूर्ति के मौखिक उत्तर में भी मिलता है और वह कहते दिखाई पड़ती हैं कि उनके पास मीडिया को बताने के लायक नहीं है इसका वीडियो राजधानी प्रतिदिन के पास उपलब्ध है जिसमें उक्त अधिकारी साफ तौर पर मीडिया से साझा करने से इनकार कर रही हैं विश्वविद्यालय ने हर्षित नाम के व्यक्ति से एक प्रेस नोट उपलब्ध कराया है जिसमें यह कहा जा रहा है कि डीजीसीए के दो प्रशिक्षण अधिकारी जो लाइसेंस सुधा है वे प्रशिक्षण प्रदान करेंगे जबकि उनके प्रश्न नोट में यह कहीं नहीं लिखा है कि उक्त अधिकारी को अधिकृत कर दिया गया है नाम कॉपी करने का भी संदेह दिखाई पड़ता है पांच दिवसी प्रशिक्षण में जागरूकता 17 आयोजित किया गया है जो 17 सितंबर से आरंभ हो चुका है इसमें भिलाई के एक हिस्से को व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए निर्धारित किया गया है ऐसा विश्वविद्यालय प्रबंधन बता रहा है इसके भी कागजात नहीं दिए गए आईटीएम विश्वविद्यालय ने प्रेस नोट में सुहावना और शानदार शब्दों का उपयोग करते हुए कई गहरी सच्चाइयों को अनदेखा कर दिया है जो विद्यार्थियों के लिए जान लेना आवश्यक है जिसमें सबसे बड़ा बात यह है कि लाइसेंस नहीं है और प्रमुख अधिकारी लक्ष्मी मूर्ति सामने आकर जवाब नहीं दे रही हैं प्रेस नोट में साफ तौर पर एक स्थान पर लिखा है कि डीजीसीए से अनुमति मिल जाएगी इसका मतलब यह होता है की अनुमति अभी नहीं मिली है तो ऐसे में प्रशिक्षण कैसे आरंभ हुआ यह एक बड़ा सवाल है जबकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों से प्रशिक्षण के लिए फीस ली गई है ऐसा अपुष्ट सूत्र बता रहे हैं विश्वविद्यालय ने अपने नया रायपुर कैंपस में बाकायदा ड्रोन प्रशिक्षण का विभाग तैयार कर उपकरण खरीद लिए हैं जिसे दिखाकर विद्यार्थियों को गुमराह किया जा रहा है वास्तविकता यह है कि उसे रूम का प्रयोग तब हो पाएगा जब विधिवत लाइसेंस होगा
अनाधिकृत प्रशिक्षण वर्जित
विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने प्रेस नोट में स्वयं इस बात को स्वीकार करता है कि अनधिकृत प्रशिक्षण या ड्रोन का उपयोग सख्त वर्जित है ऐसे में यह सवाल स्व उपस्थित हो जाता है कि बिना लाइसेंस के प्रशिक्षण की तैयारी किस प्रकार से की प्रेस नोट में लिखा है कि कृषि प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए योगदान करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है अब ऐसे में यह सवाल उठता है कि जो प्रशिक्षण वाले छात्र-छात्राएं हैं वह कैसे योगदान करेंगे जब उनके पास महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र नहीं होगा
मीडिया पर दबाव बनाने की कोशिश
विशेष सूत्रों से यह भी जानकारी प्राप्त हुई है की आईटीएम विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उक्त जानकारी को सार्वजनिक करने से रोकने के लिए तथाकथित पत्रकारों को कैंपस के अंदर एक बड़ा प्रलोभन दिया है उक्त प्रलोभन प्राप्त करने वाले पत्रकारों के नाम चैनल और स्थान स्वरूप सभी मौजूद हैं केवल गोपनीयता के ही दृष्टि से सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है अगर आवश्यकता पड़ी तो उसे भी पब्लिश कर दिया जाएगा
मैडम लक्ष्मी मूर्ति के अधिकृत व्यक्ति के जवाब
हरितंजलि की टीम ने आईटीएम विश्वविद्यालय की अधिकारी लक्ष्मी मूर्ति के द्वारा अधिकृत व्यक्ति हर्षित से विषय में जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने एक प्रेस नोट में जवाब होने की बात कही और और बार-बार एक वीडियो को दिखाकर उलझते रहे जिसमें लक्ष्मी मूर्ति वित्त मंत्री से रेड जोन में होने की बात कह कर वित्त मंत्री को भी उलझा रही हैं

