जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के मझौली में भाजपा नेता कंचन यादव की गोली मारकर हत्या मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी का अस्पताल में इलाज चल रहा है. मझौली इलाके में हुए खूनी संघर्ष ने एक बार फिर जबलपुर और महाकौशल अंचल में राजनीतिक रंजिश को लेकर होने वाली वारदातों की याद ताजा कर दी है. जानकारों का कहना है कि महाकौशल क्षेत्र में राजनीतिक हत्याओं का कोई पूर्व इतिहास नहीं रहा है, लेकिन जिस तरह की वारदात जबलपुर के मझौली के लोहारी गांव में हुई है, उसने प्रशासन के सामने न केवल सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजनीतिक दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है.
जबलपुर के मझौली के लोहारी गांव में हुई भाजपा नेता कंचन यादव की हत्या ने एक बार फिर सियासी रंजिश को लेकर होने वाली वारदातों की तरफ हर किसी का ध्यान आकर्षित किया है. पंचायत चुनाव से चली आ रही रंजिश रंग पंचमी के दिन खूनी वारदात में तब्दील हो गई. रात के अंधेरे में गांव के पूर्व सरपंच और उसके परिवार के लोगों ने भाजपा नेता कंचन यादव को घेर कर गोली मार दी और उन्हें मौत के घाट उतार दिया.
इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है, जबकि चौथे आरोपी का मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज चल रहा है. पुलिस का कहना है कि इलाज के बाद जैसे ही आरोपी डिस्चार्ज होगा, उसे भी हिरासत में ले लिया जाएगा. हत्याकांड की इस पूरी वारदात के पीछे जो कहानी निकल कर सामने आ रही है. उसके मुताबिक मृतक और आरोपी पक्ष के बीच पंचायत चुनाव के समय से ही रंजिश चली आ रही थी. इस बीच चुनाव जीतने के बाद मृतक कंचन यादव के सरपंच बेटे ने प्रशासन के साथ मिलकर गांव से लगी हुई 52 एकड़ जमीन को कब्जा मुक्त कराया था.
आरोप लग रहे हैं कि कब्जा मुक्त कराई गई जमीन पर पूर्व सरपंच और आरोपी पक्ष के लोगों ने कब्जा कर रखा था. इसी रंजिश के चलते ही दोनों परिवारों के बीच की खाई काफी गहरी हो चली थी. रंग पंचमी के दिन मौका पाकर आनंद सिंह और आयुष ने अपने साथियों के साथ मिलकर लोहारी गांव के सरपंच राहुल यादव के पिता और भाजपा नेता कंचन यादव पर फायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था.
मध्यप्रदेश में साल के आखिर में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. उसके पहले ही जबलपुर के मझौली से लगे हुए लोहारी गांव में हुई इस वारदात ने सियासी रंजिश को लेकर हिंसक वारदातों का रेड सिग्नल दे दिया है. हालांकि जानकारों का कहना है कि जबलपुर और महाकौशल अंचल में सियासी हत्याओं का कोई पूर्व इतिहास नहीं रहा है, लेकिन इस तरह की वारदातों का होना कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन के सामने तो चुनौती ही है. साथ ही इस और राजनीतिक दलों को भी सोचना होगा.
पंचायत चुनाव से शुरू हुई सियासी रंजिश जिस तरह से हिंसक और खूनी वारदात में तब्दील हुई है. उसके बाद मझौली इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है. एहतियात के तौर पर पुलिस ने पुलिस बल की तैनाती कर दी है. ताकि किसी तरह की कोई और वारदात ना हो पाए, लेकिन जिस तरह से भाजपा नेता कंचन यादव को गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया है. उसने पुलिस और प्रशासन को अलर्ट कर दिया है. आने वाले दिनों में पुलिस को और भी ज्यादा सतर्क रहना होगा.
