डोंडी – सिंचाई विभाग में एक बड़ी अनियमितता का मामला आदिवासी ब्लाक मुख्यालय डोंडी से सामने आया है।ब्लॉक में लगभग 5 करोड़ की राशि का कार्य कुंवागोंदी व्यपर्तन नहर लायनिंग कार्य लागत 2 करोड़ 26 लाख और कोटागांव व्यपर्तन नहर लाइनिंग कार्य लगभग 2 करोड़ 25 लाख का कार्य ठेकेदार विष्णु प्रसाद अग्रवाल को विभाग से मिला हैँ परन्तु मेन ठेकेदार द्वारा पूरा कार्य स्वयं के बिना देख रेख में मोहन शर्मा नाम के व्यक्ति को देने की बात ग्रामीण किसान बता रहे हैँ उक्त सब ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता करते निम्न स्तर का कार्य कराने की जानकारी ग्रामीणों द्वारा दी जा रही है
जिले में जल संसाधन विभाग के अधिकारी इतने उदासीन हो गए की अपने कमीशन के लिए ठेकेदार को फ्री छोड़ दिए हैं. वहीं ठेकेदार भी मनमानी करते हुए नहर लाइनिंग के काम में गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम करा रहे हैं. प्राकलन का अनदेखा कर अमानक स्तर के मटेरियल का उपयोग कर विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर घोटाले को अंजाम देने की फिराक में है. यही वजह है कि इस तरह के कार्यों की भौतिक सत्यापन भी आंख मूंदकर अधिकारी कर दे रहे हैं.शुरुआत मे हीं उक्त लायनिंग कार्यों मे अधिकतर जगह मुरुम की जगह मिट्टी का उपयोग किया गया है, जो नहर की गुणवत्ता और स्थायित्व को प्रभावित कर सकता है।वहीँ कुछ जगह मुरुम के लिए पेटी कन्टेरेक्टर मोहन शर्मा के द्वारा शासकीय जगह तालाबों में अवैध मुरुम खनन कर जानलेवा बड़े बड़े गड्डे कर दिए गए जिससे आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा जल्द हीं बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही हैँ। गौर करने वाली बात हैँ अगर कोई जनप्रतिनिधि या मीडया के लोग कार्य स्थल पर जाकर बिना सूचना पटल व बिना अधिकारियो के निगरानी के कराये जा रहें कार्य के संबंध में जानकारी लेने पर ठेकेदार के सुपरवाईजर जो की अपना नाम जान बता कर बदसूलकी की जाती हैँ स्थानीय किसानों और नागरिकों ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नहर की गुणवत्ता और स्थायित्व को प्रभावित करने वाली इस तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।इस निर्माण कार्य में ठेकेदार की ओर से कई तरह की अनियमितताएं देखी गई. जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि ठेकेदार आनन-फानन में नहर का काम करवाकर सिर्फ बिल निकलवाना चाहता है.ना तो उसे किसानों से कुछ लेना है और ना ही शासन की योजना से.उसे सिर्फ अपना फायदा निकालकर जैसे तैसे नहर का निर्माण कार्य कर देना है.
जल संसाधन विभाग के एसडीओ घिनेन्द्र से बात की गई तो उन्होंने मामले में पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि मैंने निरीक्षण किया है. काम सही चल रहा है. अगर कही गलत तरीके से काम करते पाया गया तो जांच करवाकर गुणवत्ता पूर्ण कराई जाएगी.
