रायपुर। पुलिस द्वारा जब्त किए गए अवैध हथियारों का नष्टीकरण करने में विभागीय अधिकारी कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से थानों के मालखाने में बड़ी संख्या में अवैध हथियार इकट्ठा हो गए हैं। इन अवैध हथियारों ने मालखाना के मुंशियों की परेशानी बढ़ा दी है। मुंशी अवैध हथियारों का रिकार्ड मेंटेन करने में कागजी कार्रवाई कर-कर परेशान हैं। इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नियम नहीं है, इसलिए उनके भी हाथ बंधे हुए हैं। राज्य सरकार इस ओर कदम उठाए, तो लंबे अर्से से थाना में जमा अवैध हथियारों का नष्टीकरण करके मालाखाने को खाली किया जा सके।
कई मालखानों में रखने की जगह नहीं:
– वर्तमान में रायपुर जिले की बात करें, तो जब्त अवैध सामान और हथियारों की संख्या इतनी है कि पुलिस मालखानों में उन्हें सुरक्षित तरीके से रख भी नहीं पा रही है। जिले के कई थानों में इन हथियारों और सामान को रखने के लिए अलग से कमरा संरक्षित किया गया है। कई बार मालखाने के पुराने रजिस्टर नहीं मिलने से कुछ थानों में हथियारों का आंकड़ा भी कम हो गया है। अवैध हथियारों के बारे में कोई पूछताछ नहीं करता, इसलिए रायपुर पुलिस के अधिकारी अधीनस्थों से इस मामले में पूछताछ भी नहीं करते।
हजारों हथियार जब्त करती है पुलिस :
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार हर साल आर्म्स एक्ट के प्रदेश भर में डेढ़ हजार से ज्यादा मामले दर्ज होते हैं। रायपुर जिले की बात करें तो वर्ष 2022 में 754 प्रकरणों में 764 आरोपित को पुलिस ने पकड़ा। इन आरोपियों से 697 चाकू, तलवार 195, रिवाल्वर 5, देशी कट्टा 13, गुप्ती 3, कारतूस 32, गंडासा 2 और एक एयरगन जब्त किया है। वहीं वर्ष 2021 में रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने 292 प्रकरणों में 200 से ज्यादा चाकू, देशी कट्टा और तलवार को जब्त किया था। इसके अलावा रायपुर पुलिस ने आनलाइन चाकू खरीदने वाले जिलेवासियों से दो हजार से ज्यादा चाकू बरामद किया है।
बिलासपुर की बात करें तो वर्ष 2022 में 80 से ज्यादा मामलों में एक पिस्टल, नौ देशी कट्टे, चाकू, चापड़ा और तलवार पुलिस ने बरामद किया है। वहीं महासमुंद की बात करें तो वर्ष 2022 में पुलिस ने आर्म्स एक्ट की 38 कार्रवाई की। इस कार्रवाई में पुलिस ने 4 चाकू, 4 तलवार, एक देशी कट्टा, 9 कट्टा समेत 19 अन्य हथियार बरामद किए है। इन हथियारों को भी मालखाना में जमा करवाया गया है। ये आंकड़ा वर्ष 2022 का है। पूर्व के वर्षों में जब्त किए गए हथियार भी कोर्ट के निर्देश पर नाजरात या मालखाना में रखे हुए जंग खा रहे हैं।
2018 में नष्ट करने की थी तैयारी
वर्ष 2018 में रायपुर जिले में तत्कालीन एएसपी विजय अग्रवाल ने जब्त शराबए गांजा और चरस को नष्ट कराने के बाद लंबे समय से थानों के मालखाना में जमा अवैध हथियारों को नष्टीकरण करने की कागजी कार्रवाई की थी। उन्होंने कंडम गाड़ियों की नीलामी भी कर्रवाई की थी। गाड़ियों की नीलामी में वे सफल रहे, लेकिन अवैध हथियारों के नष्टीकरण की फाइल आगे नहीं बढ़वा पाए और उनका ट्रांसफर हो गया। एएसपी अग्रवाल के ट्रांसफर होते ही फाइल फिर दब गई।
हर जिले में स्थिति एक जैसी :
अवैध हथियारों की संख्या को लेकर हर जिले की स्थिति एक जैसी है। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, महासमुंद समेत अन्य जिलों के अफसर इन्हें सुरक्षित तरीके से रखने को लेकर चिंतित है। हर जिले के अधिकारियों ने जब्त सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने के लिए विशेष निर्देश दिए है। अधिकारियों ने मुंशी समेत थाना प्रभारियों को अवैध हथियारों की देखरेख करने और उक्त स्थान की मानीटरिंग सीसीटीवी कैमरों से करने के लिए कहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है, कि जब्ती की शराब और गांजा की कमी होने पर अफसर चूहों पर आरोप लगाकर बच जाते हैं, लेकिन हथियारों की संख्या कम हो गई, तो जिम्मेदार फिर क्या बहाना बनाएंगे।
नियम का हो पालन :
– पूर्व में कोर्ट से प्रकरण निराकरण होने के बाद हथियारों को राजसाज कर लिया जाता था। हथियार जब्त के संबंध में कोर्ट का जो निर्देश रहता था, उसका पालन करते थे। कोर्ट के निर्देश पर कुछ हथियार नष्ट कर दिए जाते थे और कुछ हथियार जो अच्छे होते थे, उनको राजसाज करके नीलाम कर दिया जाता था। नीलामी में प्राप्त राशि को सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती थी। अभी विभाग में नीलामी की प्रक्रिया लगभग बंद सी हो चुकी है।
रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर हथियारों को रखने और उनका नष्टीकरण करने का प्रावधान है। प्रकरण का निराकरण होने तक उसे सुरक्षित मालखाने या कोर्ट के नाजराज में रखा जाता है।
