आज जम्मो काम-काज के भीड़-भाड़ ले समय निकाल के अपन खेत पहुंचे रहेंव। रोपा बर धान के थहरा उखाड़त बेरा, बड़ दिन बाद माटी के ओ सुगंध ला ले पायेंव।

ओ दिन के बेरा मोला आजो साफ-साफ सुरता आथे – जब हमन जम्मो परिवार संग खेत म उतर के रोपा लगावत रहेंन।
धान – सिरिफ फसल नो हे, ये हमर अस्मिता आय। ओ माटी जेमे हमर पसीना मिलय हे, ओमा हमर संस्कार जड़ पकड़े हवय।
छत्तीसगढ़ के माटी, ओमा उपजत धान, अउ ओ धान ला रोपेइया हाथ – येच हमर असली संस्कृति आय।
हमर जिम्मेदारी हे, के ए धरोहर ला हमन सम्हाल के रखन।
जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ महतारी।
