आज दिनांक 28 सितंबर 25 को, विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर , नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम (NRCP), के तहत् , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथिलेश चौधरी जी के निर्देशन में, एवं आई डी एस पी नोडल अधिकारी डॉ विमल किशोर राय व टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर श्वेता सोनवानी के मार्ग दर्शन में, विश्व रेबीज दिवस का आयोजन किया गया इस अवसर पर हमर क्लीनिक के मेडिकल ऑफिसर एवं नर्सिंग स्टॉफ को प्रशिक्षित भी किया गया।
प्रशिक्षण मेडिकल कॉलेज की psm डिपार्टमेंट की डॉक्टर माधवी महंत के द्वारा दिया गया।
इस वर्ष विश्व रेबीज दिवस की थीम ” Act now you ,me community ” रखा गया हैं।
इस थीम का उद्देश्य है कि व्यक्तिगत , सामाजिक, व सामुदायिक स्तर पर “अब तत्काल कार्यवाही ” के माध्यम से जागरूकता और सक्रिय भागीदारी उत्पन्न कर के रेबीज से होने वाली मृत्यु को 2030 तक रोकना है।
दिनांक 22 से 28 सितंबर तक विश्व रेबीज सप्ताह के रूप में ब्लॉक शहरी क्षेत्रों में मनाया जा रहा।।
विश्व रेबीज दिवस 28 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूक करना और इसके उन्मूलन के लिए प्रयास करना है
यह दिन लुई पाश्चर की पुण्यतिथि के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने पहला रेबीज टीका विकसित किया था।
विश्व रेबीज दिवस 2025 के लिए महत्वपूर्ण बातें
– थीम इस वर्ष की थीम “रेबीज की सीमाओं को तोड़ना” है, जो रोग प्रबंधन में बाधाओं को दूर करने और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
– रेबीज के लक्षण रेबीज के लक्षणों में शामिल हैं अत्यधिक लार आना, जलन या झुनझुनी महसूस होना, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में कठिनाई।
– रेबीज की रोकथाम: रेबीज को रोकने के लिए पालतू जानवरों का टीकाकरण, जानवरों के काटने से बचना और घाव को तुरंत साफ करना आवश्यक है।
– जागरूकता: विश्व रेबीज दिवस का उद्देश्य लोगों को रेबीज के बारे में जागरूक करना और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है ।
रेबीज से बचाव के लिए सुझाव
– पालतू जानवरों का टीकाकरण अपने पालतू जानवरों को नियमित रूप से रेबीज के टीके लगवाएं।
– जानवरों के काटने से बचें अज्ञात जानवरों के संपर्क से बचें और बच्चों को जानवरों के साथ सावधानी से पेश आने की सलाह दें।
– घाव की देखभाल: यदि कोई जानवर आपको काट लेता है, तो घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं और चिकित्सक से परामर्श लें।
टीकाकरण
रेबीज के उच्च जोखिम वाले लोगों को टीकाकरण करवाना चाहिए ।
