

- वरिष्ठता निर्धारण में त्रुटि कर कनिष्ठ शिक्षकों को वरीयता दी गई तथा वरिष्ठ शिक्षकों को अनुचित रूप से “अतिशेष” घोषित किया गया।
- पूर्व से विषयवार पदस्थ शिक्षकों वाले विद्यालयों में भी नए पदोन्नत शिक्षकों को पदस्थ कर जानबूझकर नियम विरुद्ध “अतिशेष” घोषित किया गया।
- वास्तविक रिक्त पदों को छिपाकर और आवश्यकता से अधिक पदांकन दर्शाकर युक्तियुक्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई, जो नियम एवं पारदर्शिता दोनों के विपरीत है।
- न्यायालयीन प्रकरण होने व न्यायलीन निर्देशों के बावजूद पिछले 5–6 महीनों से संबंधित शिक्षकों का मूल शाला में ना तो कार्यभार ग्रहण कराया गया ऊपर से वेतन आहरण 5-6 माह से अनैतिक एवं अवैधानिक रूप से रोका गया है, जिससे शिक्षक-परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
- अभ्यावेदन एवं स्पष्टीकरणों पर विभागीय स्तर पर गठित चार स्तरीय समितियां में अभ्यावेदन लेने से इनकार किया जा रहा और किसी तरह से ले भी दिया जाता है तो उचित सुनवाई नहीं की जा रही है, जिससे शिक्षक वर्ग में असंतोष व्याप्त है।
- पति पत्नि एक स्थान आधार पर पूर्व में स्थानांतरण करवाकर आए है उन्हें युक्तिकरण में फिर दूर भेजना सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के विपरीत है (साथ ही पूरे सर्विस काल में सिर्फ एक बार पति पत्नि आधार पर स्थानांतरण हो सकता है ) ,
- गंभीर बीमारी के आधार तो पूर्व से लागू है अनुसार राहत मिलनी चाहिए ।
- 2008 सेटअप पदसंरचना अनुसार अतिशेष चिन्हाकन किया जाय ।
- इन परिस्थितियों से शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और विद्यालयों में शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
