इंस्टीट्यूशनल
डॉ समृद्धि दुबे क्या चाहती थी?
एक डॉक्टर,दोहरा लाभ
डॉ समृद्धि दुबे NEET PG में तमिलनाडु के स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल हैं,लेकिन वो ये चाहती हैं थी कि वो तमिलनाडु के साथ साथ छत्तीसगढ़ के स्टेट कोटे के लिए भी एलिजिबल हो जाएं। मतलब वो दोहरा लाभ चाह रही थी। माननीय हाईकोर्ट ने उन्हें दोहरा लाभ देने से मना कर दिया,किंतु उनके केस में NEET PG के एडमिशन रूल्स 2025 के 11a एवं 11b के इंस्टीट्यूशनल प्रिफरेंस को रद्द कर दिया।
इंस्टीट्यूशनल प्रिफरेंस क्या है?
तमिलनाडु या अन्य किसी राज्य से पढ़ा कोई डॉक्टर अगर छत्तीसगढ़ के स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल नहीं है,तो छत्तीसगढ़ से पढ़ा डॉक्टर भी तमिलनाडु या अन्य किसी राज्य के स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल नहीं है,यह कोई डिस्क्रिमेशन नहीं है,ये तो स्टेट कोटे के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया है।इंस्टीट्यूशनल प्रिफरेंस को समझने की जरूरत है,ये कोई रिजर्वेशन नहीं है, इंस्टीट्यूशनल प्रिफरेंस,स्टेट कोटे के लिए पात्रता मात्र है।
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट डोमिसाइल अनकंस्टीट्यूशनल डिक्लेयर होने के बाद किसी भी राज्य के स्टेट कोटे के लिए मात्र दो ही एलिजिबल क्राइटेरिया का विकल्प है.पहला इंस्टीट्यूशनल डोमिसाइल(इंस्टीट्यूशनल प्रिफरेंस -राज्य के मेडिकल यूनिवर्सिटी से पढ़ें डॉक्टर्स) और दूसरा सर्विस डोमिसाइल (राज्य के सरकारी अस्पतालों में सेवा दे रहे डॉक्टर्स). मतलब किसी भी राज्य में राज्य के मेडिकल यूनिवर्सिटी से पढ़े डॉक्टर और सरकारी अस्पतालों में सेवा दे रहे डॉक्टर्स ही स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल हैं।
*ओपन कोटा और डिस्क्रिमेशन*
*दोहरा लाभ*
अगर तमिलनाडु के डॉक्टर और साथ ही साथ देश के सभी राज्य के डॉक्टर्स छत्तीसगढ़ के स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल हैं और छत्तीसगढ़ के डॉक्टर्स तमिलनाडु के स्टेट कोटे और अन्य किसी भी राज्य के स्टेट कोटे के लिए एलिजिबल नहीं है,तो वास्तव में ये डिस्क्रिमेशन है और आर्टिकल 14 का वायलेशन भी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल PG के नए अमेंडेड रूल्स के ओपन कोटा में बिल्कुल यही प्रावधान जोड़ा गया है। माननीय हाईकोर्ट ने डॉ समृद्धि दुबे के केस में स्टेट कोटे का दोहरा लाभ देना खारिज कर दिया था,किंतु उन्हें इस नए रूल्स के द्वारा दोहरा लाभ राज्य सरकार ने दे दिया,इसके साथ ही अन्य राज्यों के सभी डॉक्टर्स को भी दो स्टेट कोटे का दोहरा लाभ लेने के लिए पात्र कर दिया।
मतलब छत्तीसगढ़ से पढ़े डॉक्टर्स देश के किसी भी राज्य के स्टेट कोटे के लिए पात्र नहीं है,लेकिन 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के डॉक्टर्स छत्तीसगढ़ स्टेट कोटे के लिए पात्र हो गए हैं। सभी राज्य के डॉक्टर्स को उनके राज्य के साथ साथ छत्तीसगढ़ राज्य के स्टेट कोटे में पात्र होने से दोहरा लाभ मिल रहा है और छत्तीसगढ़ राज्य के डॉक्टर्स सिर्फ अपने राज्य में पात्र हैं। ये वास्तविक डिस्क्रिमेशन है,जो कि छत्तीसगढ़ से पढ़े डॉक्टर्स के साथ हो रहा है।
*एक नागरिक,एक विधानसभा*
*एक डॉक्टर,एक स्टेट कोटा*
2.5 करोड़ की जनसंख्या वाले छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों के 135 करोड़ भारतीय भी क्या विधानसभा चुनाव में वोट देने के लिए पात्र हो सकते हैं ?नहीं,ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है,लेकिन राज्य सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों के लिए ऐसा ही नियम लागू कर दिया है और देश भर के 2.5 लाख MBBS डॉक्टर्स को छत्तीसगढ़ मेडिकल पीजी के स्टेट कोटे के लिए पात्र कर दिया है। गौर करने वाली बात ये भी है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 50% ऑल इंडिया कोटा भी है,जिसमें देश के सभी राज्यों के डॉक्टर्स पहले से ही पात्र हैं।
न छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा नियम बना था और न ही देश के किसी भी अन्य राज्य में ऐसा नियम आज तक बना है जिसमें अन्य राज्य के डॉक्टर्स को स्टेट कोटे के लिए पात्र कर दिया गया हो।
जिस प्रकार एक नागरिक केवल एक राज्य के विधानसभा चुनाव में ही वोट देने के लिए पात्र हो सकता है,उसी प्रकार एक डॉक्टर को मेडिकल पीजी में केवल एक राज्य के स्टेट कोटे के लिए पात्र होना चाहिए,जैसा कि अन्य राज्यों में लागू है,वैसा हमारे राज्य में भी हो,हमारी मांग बस इतनी सी है और यही मामला माननीय हाईकोर्ट में विचाराधीन है और DME ने इस मैटर पर ही क्लैरिफिकेशन के लिए हाईकोर्ट में 09 जनवरी 2026 को पिटीशन फाइल की है।
Dr Iqbal Husaain
Ex president
CIDA
