रायपुर. विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट शाखा रायपुर द्वारा अवधपुरी मैदान, गुढ़ियारी में पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू जी महाराजश्री
महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यासपीठ पर वक्ता नहीं स्वयं नारायण बोलते हैं, चाहे संत कोई भी हो. आज कथा का अंतिम दिवस है. इन सात दिनों में गुढ़ियारी के आसपास के क्षेत्र में भक्तिमय उत्सव का माहौल बना रहा. कथा सुनने आसपास के शहरों-गांवों से भी लोग आये जिनमें मातायें-बहनें बहुतायत में रहीं. आज हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं. कुछ क्षेत्रों में वे पुरुषों से भी आगे हैं. अत: परिवार में बालिका के जन्म लेने पर उत्सव मनायें. बेटे ज्यादा पढ़-लिख लिये तो विदेशों में बस जाते हैं, माता-पिता अकेले रह जाते हैं. बेटियां तो ससुराल जाकर भी अपने माता-पिता की चिंता करती हैं.
महाराजश्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की आठ रानियां रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, सत्या और लक्षमणा थी. असुरराज नरकासुर अपने बंदी गृह में 16 हजार 100 महिलाओं को बंदी बनाकर उन पर तरह-2 के अत्याचार करता था तब प्रभु श्री ने देवताओं एवं धरती माता के अनुरोध पर नरकासुर का वध कर नारियों को मुक्त कराया. अपने सामाजिक बहिष्कार एवं अपमान के भय से उन्होंने श्री कृष्ण जी से उन्हें पत्नी के रुप में स्वीकारने का अनुरोध किया. इस तरह भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार 108 पत्नियां हुईं.
महाराजश्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि रुक्मिणी जी कभी नाराज नहीं होती थीं उन्होंने उनकी परीक्षा लेने स्वयं की बुराई करते हुए शिशुपाल सहित अन्य राजाओं से विवाह क्यों नहीं करने का प्रश्न उठाया. उनके व्यंग्य बाणों से रुक्मिणी जी अचेत हो गईं. प्रभु को लगा उनसे त्रुटि हो गई, उन्होंने रुक्मिणी जी को अचेतावस्था से बाहर निकाला. तब रुक्मिणी जी ने कहा मैं आपसे विवाह कर धन्य हूँ, आप सबसे निपुर्ण हैं, मुझे मालूम है आप ही नारायण हैं. महाराजश्री ने शिशुपाल वध की कथा भी विस्तार से सुनाये.
सुदामा चरित्र की ओर कथा को बढ़ाते हुए महाराजश्री ने बताया कि उनकी पत्नी गरीबी से बहुत ही ज्यादा दुखी रहती थी. एक बार ऐसा अवसर आया कि 10 दिनों तक वे बच्चों सहित भूखे रहे. छोटा बेटा तो अचेत हो गया. तब सुशीला ने पति सुदामा से बहुत ही रुदन, भावपूर्ण स्वर में द्वारिकाधीश से भेंट करने को कहा. सुदामा, फटे वस्त्रों में, नंगे पांव द्वारिका की ओर निकल पड़े. साथ में श्री कृष्ण के लिये पत्नी द्वारा भेंट हेतु दिया चॉवल वो रखे थे. चलते-2 उनके पांव में छाले पड़ गये, अचेत हो गये, तब मायावी प्रभु ने गरुड़ जी से उन्हें लाने भेजा, जो उन्हें द्वारिका तक लेकर आये. चेतना आने पर उन्हें द्वारिका में होने का पता चला. वे लोगों से पता पूछते महल तक पहुंचे. व्यंग्य बाण चलाते द्वारपालों से निवेदन कर श्री कृष्ण तक अपने आगमन का संदेश पहुंचवाया. तब श्री कृष्ण बेसुध दौड़ते हुए द्वार तक आये. पीछे-2 महल के सारे लोग भी दौड़ते हुए पहुंचे. श्री कृष्ण, सुदामा की हालत देखकर बहुत दुखी हुए. उन्हें महल ले जाकर जल और अश्रुधारा से पग पगराये, नवीन वस्त्र धारण करवाये, रुक्मिणी जी के बनाये 56 व्यंजनों से भोदन करवाये. पश्चात अपनी भाभी के भेजे उपहार के बारे में बार-2 पूछने लगे. सुदामा लज्जा और संकोच में विषय को बदलते रहे. अंत में श्री कृष्ण ने सुदामा के हाथ में रखी पोटली छीन ली, जिसमें तरह-2 का चॉवल था. श्री कृष्ण जी को समझते देर ना लगी कि यह भिक्षा सेरायपुर. विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट शाखा रायपुर द्वारा अवधपुरी मैदान, गुढ़ियारी में पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू जी महाराजश्री श्रीमद् भगवद् पुराण कथा के सप्तम दिवस सुदामा चरित्र की कथायें सुनाईं.
महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यासपीठ पर वक्ता नहीं स्वयं नारायण बोलते हैं, चाहे संत कोई भी हो. आज कथा का अंतिम दिवस है. इन सात दिनों में गुढ़ियारी के आसपास के क्षेत्र में भक्तिमय उत्सव का माहौल बना रहा. कथा सुनने आसपास के शहरों-गांवों से भी लोग आये जिनमें मातायें-बहनें बहुतायत में रहीं. आज हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं. कुछ क्षेत्रों में वे पुरुषों से भी आगे हैं. अत: परिवार में बालिका के जन्म लेने पर उत्सव मनायें. बेटे ज्यादा पढ़-लिख लिये तो विदेशों में बस जाते हैं, माता-पिता अकेले रह जाते हैं. बेटियां तो ससुराल जाकर भी अपने माता-पिता की चिंता करती हैं.
महाराजश्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की आठ रानियां रुक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, सत्या और लक्षमणा थी. असुरराज नरकासुर अपने बंदी गृह में 16 हजार 100 महिलाओं को बंदी बनाकर उन पर तरह-2 के अत्याचार करता था तब प्रभु श्री ने देवताओं एवं धरती माता के अनुरोध पर नरकासुर का वध कर नारियों को मुक्त कराया. अपने सामाजिक बहिष्कार एवं अपमान के भय से उन्होंने श्री कृष्ण जी से उन्हें पत्नी के रुप में स्वीकारने का अनुरोध किया. इस तरह भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार 108 पत्नियां हुईं.
महाराजश्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि रुक्मिणी जी कभी नाराज नहीं होती थीं उन्होंने उनकी परीक्षा लेने स्वयं की बुराई करते हुए शिशुपाल सहित अन्य राजाओं से विवाह क्यों नहीं करने का प्रश्न उठाया. उनके व्यंग्य बाणों से रुक्मिणी जी अचेत हो गईं. प्रभु को लगा उनसे त्रुटि हो गई, उन्होंने रुक्मिणी जी को अचेतावस्था से बाहर निकाला. तब रुक्मिणी जी ने कहा मैं आपसे विवाह कर धन्य हूँ, आप सबसे निपुर्ण हैं, मुझे मालूम है आप ही नारायण हैं. महाराजश्री ने शिशुपाल वध की कथा भी विस्तार से सुनाये.
सुदामा चरित्र की ओर कथा को बढ़ाते हुए महाराजश्री ने बताया कि उनकी पत्नी गरीबी से बहुत ही ज्यादा दुखी रहती थी. एक बार ऐसा अवसर आया कि 10 दिनों तक वे बच्चों सहित भूखे रहे. छोटा बेटा तो अचेत हो गया. तब सुशीला ने पति सुदामा से बहुत ही रुदन, भावपूर्ण स्वर में द्वारिकाधीश से भेंट करने को कहा. सुदामा, फटे वस्त्रों में, नंगे पांव द्वारिका की ओर निकल पड़े. साथ में श्री कृष्ण के लिये पत्नी द्वारा भेंट हेतु दिया चॉवल वो रखे थे. चलते-2 उनके पांव में छाले पड़ गये, अचेत हो गये, तब मायावी प्रभु ने गरुड़ जी से उन्हें लाने भेजा, जो उन्हें द्वारिका तक लेकर आये. चेतना आने पर उन्हें द्वारिका में होने का पता चला. वे लोगों से पता पूछते महल तक पहुंचे. व्यंग्य बाण चलाते द्वारपालों से निवेदन कर श्री कृष्ण तक अपने आगमन का संदेश पहुंचवाया. तब श्री कृष्ण बेसुध दौड़ते हुए द्वार तक आये. पीछे-2 महल के सारे लोग भी दौड़ते हुए पहुंचे. श्री कृष्ण, सुदामा की हालत देखकर बहुत दुखी हुए. उन्हें महल ले जाकर जल और अश्रुधारा से पग पगराये, नवीन वस्त्र धारण करवाये, रुक्मिणी जी के बनाये 56 व्यंजनों से भोदन करवाये. पश्चात अपनी भाभी के भेजे उपहार के बारे में बार-2 पूछने लगे. सुदामा लज्जा और संकोच में विषय को बदलते रहे. अंत में श्री कृष्ण ने सुदामा के हाथ में रखी पोटली छीन ली, जिसमें तरह-2 का चॉवल था. श्री कृष्ण जी को समझते देर ना लगी कि यह भिक्षा से प्राप्त चॉवल है. भगवान ने बड़े प्रेम से दो मुट्ठी चॉवल खाया और सुदामा को दो लोकों का स्वामी बना दिया जैसे ही वे तीसरी मुट्ठी खाने वाले थे रुक्मिणी जी ने उन्हें रोक दिया. प्रभु की ये माया सुदामा को वापस अपने गांव आने पर ही पता चली क्योंकि उनकी झोपड़ी महल में बदल चुकी थी. महाराजश्री ने यशोदा मैया के गो-लोक गमन के प्रसंग को भी सुनाया. सम्पूर्ण कथायें बहुत ही भावपूर्ण रहीं, कथा के प्रसंगों के साथ श्रोतागण कभी आनंदित, कभी उदास, तो कभी गीत-संगीत के साथ नाचते-झूमते रहे.
-गये श्याम सुंदर दास मिलने से सुदामा…!
-राह में आये जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो…!
आदि संगीतमयी भजनों में श्रद्धालुगण झूमते-नाचते रहे.
महाराजश्री ने इस भव्य आयोजन के लिये यजमानगण जितेन्द्र अग्रवाल सारिका अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, ओमप्रकाश मिश्रा, मयंक वैद्य, चन्द्रचूड़ त्रिपाठी, रोहित मिश्रा, आशीष तिवारी, मनोज तिवारी, मीडिया प्रभारी नितिन कुमार झा के कार्यों की मुक्त कण्ठ से सराहना की. आज कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी सपत्निक कथा श्रवण करने पहुंचे थे जिनका व्यासपीठ से महाराजश्री ने स्वागत किया. वरिष्ठ समाजसेवी श्री पवन अग्रवाल जी को विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट छत्तीसगढ़ के मुख्य प्रभार की जिम्मेदारी दी गई.
नितिन कुमार झा
मीडिया प्रभारी
श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति
मो. 7999594065 प्राप्त चॉवल है. भगवान ने बड़े प्रेम से दो मुट्ठी चॉवल खाया और सुदामा को दो लोकों का स्वामी बना दिया जैसे ही वे तीसरी मुट्ठी खाने वाले थे रुक्मिणी जी ने उन्हें रोक दिया. प्रभु की ये माया सुदामा को वापस अपने गांव आने पर ही पता चली क्योंकि उनकी झोपड़ी महल में बदल चुकी थी. महाराजश्री ने यशोदा मैया के गो-लोक गमन के प्रसंग को भी सुनाया. सम्पूर्ण कथायें बहुत ही भावपूर्ण रहीं, कथा के प्रसंगों के साथ श्रोतागण कभी आनंदित, कभी उदास, तो कभी गीत-संगीत के साथ नाचते-झूमते रहे.
-गये श्याम सुंदर दास मिलने से सुदामा…!
-राह में आये जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो…!
आदि संगीतमयी भजनों में श्रद्धालुगण झूमते-नाचते रहे.
महाराजश्री ने इस भव्य आयोजन के लिये यजमानगण जितेन्द्र अग्रवाल सारिका अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, ओमप्रकाश मिश्रा, मयंक वैद्य, चन्द्रचूड़ त्रिपाठी, रोहित मिश्रा, आशीष तिवारी, मनोज तिवारी, मीडिया प्रभारी नितिन कुमार झा के कार्यों की मुक्त कण्ठ से सराहना की. आज कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी सपत्निक कथा श्रवण करने पहुंचे थे जिनका व्यासपीठ से महाराजश्री ने स्वागत किया. वरिष्ठ समाजसेवी श्री पवन अग्रवाल जी को विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट छत्तीसगढ़ के मुख्य प्रभार की जिम्मेदारी दी गई.
नितिन कुमार झा
मीडिया प्रभारी
श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति
मो. 7999594065
