गौरेला पेंड्रा मरवाही, सीसीएफ बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) वन मंडल में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 एवं लेखापाल भूपेंद्र साहू को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में फर्जी प्रमाणक, कूटरचना और फर्जी भुगतान कर गबन करने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विशेष रूप से बहुचर्चित गोबर खाद घोटाले में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद हुई है।
जानकारी के अनुसार, भूपेंद्र साहू पिछले लगभग 10 वर्षों से एक ही कैंपा शाखा में पदस्थ था। इस दौरान उस पर करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे। बताया जा रहा है कि उसके खिलाफ दर्जनों शिकायतें विभाग को मिली थीं, लेकिन तत्कालीन डीएफओ स्तर से उसे लगातार संरक्षण मिलता रहा, जिसके चलते कार्रवाई लंबे समय तक टलती रही।
सूत्रों के मुताबिक, गोबर खरीदी योजना में फर्जी भुगतान और दस्तावेजों के आधार पर राशि आहरित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके अलावा नरवा विकास योजना, ग्रीन क्रेडिट योजना, वन प्रबंधन समितियों की राशि आहरण अनुमति सहित कई योजनाओं में भी वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया।
वन विभाग के भीतर इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ “पहली बड़ी कड़ी कार्रवाई” माना जा रहा है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि भूपेंद्र साहू से जुड़े अन्य मामलों और शिकायतों पर विभाग कब संज्ञान लेगा और क्या इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
