रायपुर। राजधानी रायपुर के बैरन बाजार स्थित जिला पशु रोगी कल्याण समिति एवं शासकीय पशु चिकित्सालय में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था का मामला सामने आया है। आरोप है कि अपने बीमार पशुओं को लेकर इलाज के लिए पहुंचे पशुपालकों को घंटों अस्पताल परिसर के बाहर खड़े होकर इंतजार करना पड़ा, जबकि जिम्मेदार डॉक्टर चाय और अन्य निजी कार्यों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आए।
पशुपालकों का कहना है कि अस्पताल में समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलने के कारण बीमार पशुओं की स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को न तो कोई स्पष्ट जानकारी दी जाती है और न ही उनकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाता है। इससे आम जनता में भारी नाराजगी व्याप्त है।
प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जनहितकारी सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जिला पशु चिकित्सालय की यह स्थिति उन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है। सवाल यह उठता है कि जब राजधानी के प्रमुख शासकीय पशु चिकित्सालय का यह हाल है तो दूरदराज के क्षेत्रों में पशुपालकों को कैसी सुविधाएं मिल रही होंगी?
स्थानीय लोगों और पशुपालकों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आम जनता का सरकारी व्यवस्था और सरकार दोनों से विश्वास उठना तय है।
पशुपालकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार डॉक्टरों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा अस्पताल में समयबद्ध और जवाबदेह चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पशुपालक को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद संबंधित विभाग और प्रशासन जागता है या फिर पशुपालकों को इसी तरह बदहाल व्यवस्था का शिकार होना पड़ेगा।ध्यान दें: यदि आपके पास डॉक्टर के देर से आने, अनुपस्थिति या किसी विशेष घटना के प्रमाण (वीडियो, फोटो, समय आदि) हैं, तो उन्हें शामिल करने से खबर और अधिक मजबूत एवं तथ्यात्मक बनेगी।
