

कोरिया-सोनहत : मझारटोला स्थित आदिवासी बालक आश्रम में कक्षा चौथी के छात्र प्रिंस सिंह उर्फ ‘भीम’ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 एवं सहपठित धारा 14 के तहत आयोग को प्राप्त प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत इस पूरे विषय का त्वरित एवं दृढ़ता से संज्ञान लिया जाएगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि संपूर्ण मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग द्वारा इसका स्पष्ट प्रतिवेदन मंगवाया जाएगा। संबंधित विभाग को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर पूरे मामले में अपना उत्तर देना होगा। इसके उपरांत अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत कार्रवाई की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।डॉ. वर्णिका शर्मा के इस सख्त बयान के बाद आश्रम में छात्र की मौत का मामला और गंभीर हो गया है। अब आयोग की जांच और विभाग से मांगे जाने वाले प्रतिवेदन पर सभी की नजरें टिकी हैं।
