रायपुर/छत्तीसगढ़ में वैसे बोला जाए तो एक विभाग बहुत ही शुर्खियो में छाया हुआ है वनविभाग? ऐसा क्या कारण है कि विभाग के अधिकारियों का सारी गलतियो को वन मंत्री दर किनार करते आ रहे है। इतने बड़े बड़े मामले सामने आए फिर भी विभाग के मंत्री उनके ऊपर आज तक कार्यवाही करने में असफल रहे, हाल में वन विभाग में बहुत सारे अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया क्या स्थानांतरण एक दिखावा था क्योंकि कार्यवाही ना करना पड़े इसलिए स्थानांतरण कर दिया जाना बेहतर है क्योंकि जितने लोगो का स्थानांतरण हुआ है उसमें ज्यादातर लोगो की ताजपोसी की गई है। हाल में ही सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला है कि उच्च अधिकारियों के साथ निचलेक्रम के कर्मचारियों के सी.आर खराब करने की जानकारी सामने आ रही है निचलेक्रम के जो कर्मचारियों पैसा दे रहा है उनके सी.आर. को ग्रेड दे दिया जा रहा है और जो कर्मचारी पैसा नही दे पा रहा है उनके सी.आर. खराब कर दिए जा रहे है। इसमें सबसे ज्यादा तो उत्पीड़न महिला कर्मचारियों का किया जा रहा है। बताया जाता है कि महिला कर्मचारियों को तो कई तरीकों से उच्च अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किया जाना सामने आ रहा है अगर उनकी बातें नही मानी गई तो तुम्हारे सी.आर. खराब कर दिए जायेंगे ऐसा किया जाना शर्म की बात है और यहाँ तक उनकी बातें नही मानोगे तो ऐसी जगह ट्रांसफ़र कर दिया जाएगा जिससे आप परेशान होते रहोगे ऊपर से धमकी फ्री में मिलता है,क्या वनविभाग में महिला शोषण बंद होगा उनको सम्मान मिलेगा विभाग से अगर ऐसे ही महिला कर्मचारियों का उत्पीड़न होता रहेगा तो महिला कभी भी आगे नही बढ़ पाएगी। वन विभाग में ज्यादातर कर्मचारियों में रेन्जर, डिप्टी रेन्जर ,वनपाल,बीट गार्ड ,फॉरेस्ट गार्ड लोगो के सी.आर. खराब करने का खेल बहुत ही जोरो से चल रहा है और अनुभव वाले डिप्टी रेंजर लोगो को पदोन्नति का लाभ नही प्राप्त हो पा रहा है अनुभवहीन डिप्टी रेन्जर लोगो को प्रभार दिए बैठे है और भ्रष्टाचार कराए जा रहे है जिसकी पोल दर पदर हम खोलते जा रहे है और यह काम हमारे द्वारा निरंतर चलता रहेगा। अभी हाल में हमने धमतरी वनमंडल का एक खबर प्रकाशित किया था कि जूनियर डिप्टी रेंजर रूपेन्द्र साहू को 3-3 जगह का प्रभार दिए बैठे है जिनके ऊपर तत्कालीन वनमंडला अधिकारी मयंक पांडेय बहुत ही मेहरबान थे और एक वनपाल राकेश तिवारी 20-25 सालों से एक ही वनमंडल में जमे हुए है और कुछ महिला कर्मचारी भी 20-20 सालों से डिपो में अपना डेरा जमा कर बैठी है इन कर्मचारियों के ऊपर विभाग के उच्च अधिकारियों की दूर दृष्टि क्यों नही पड़ती है ऐसा क्या है इन लोगो मे कि इनको फेविकोल की तरह वनमंडल में चिपका के बैठाए है।राकेश तिवारी को बीट और सर्कल का चार्ज दिया गया है जबकि नियम में नही है ऐसे बहुत सारे वनमण्डलो की पोल खोल खबर के साथ अगले अंक में आएंगे।
