अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों को कुछ साल पहले तक बढ़ती उम्र में होने वाले रोगों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन आज के समय में यह समस्या 50 से कम उम्र के लोगों में भी देखी जा सकती है। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है। यह एक प्रगतिशील बीमारी है जो अमूमन स्मृति हानि से शुरू होती है और जीवन के लिए कई सारी समस्याओं का कारण बन सकती है। लेकिन हाल ही में अल्जाइमर और डिमेंशिया पर हुए एक शोध ने सबको चौंकाकर रख दिया है। शोध में कहा गया है कि जीवन में उद्देश्यों की कमी होने पर भी अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा होता है। उद्देश्यों के प्रति सजग रहने से इन बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। मेडिकल पत्रिका जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अध्ययन में ये निष्कर्ष सामने आए हैं।
जीवन के उद्देश्य नकारात्मकता से रखते हैं दूर-
अध्ययन की प्रमुख लेखिका एंजेलिना सुतिन ने कहा, जीवन में किसी उद्देश्य का होना हमें दिशा देता है। यह हमारे मस्तिष्क की भलाई का काम करता है। जीवन के नकारात्मक घटनाक्रमों के ये उद्देश्य मस्तिष्क पर हावी नहीं होने देते। अध्ययन में पाया गया कि अधिक उद्देश्य रखने वाले व्यक्तियों में डिमेंशिया, अल्जाइमर और अन्य मनोरोग विकसित होने की संभावना कम है। 30 हजार लोगों के पर हुए अध्ययन में ये जानकारी सामने आई है। इसके लिए प्रतिभागियों का वर्ष 2006 से 2021 तक का स्वास्थ्य डाटा की जांच की गई। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों को शोधार्थियों द्वारा पूछे गए कई प्रश्नों का जवाब देना पड़ा।
जीने की इच्छा होने लगती है खत्म-
विशेषज्ञों ने कहा, किसी व्यक्ति के लिए जीवन में उद्देश्य की मजबूत भावना होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जीवन में उद्देश्य नहीं होने से उदासीनता दिमाग पर भारी पड़ने लगती है। इससे व्यक्ति डिमेंशिया में चला जाता है और कई बार जीवन जीने की उसकी इच्छा खत्म होने लगती है। उदासीनता से बचने के लिए जीवन में अपने उद्देश्य को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यह जीवन की गुणवत्ता को अच्छा करता है।
दिमागी खेलों से कम होगी समस्या-
मोनाश यूनिवर्सिटी में स्थित स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड प्रीवेंटिव मेडिसिन में हुए एक अन्य शोध में बताया गया कि दिमागी खेल जैसे क्रॉसवर्ड और शतरंज खेलने से बुजुर्गों में डिमेंशिया की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है। इन खेलों के साथ कुछ शारीरिक गतिविधियों से बुजुर्गों में 11 प्रतिशत तक डिमेंशिया का खतरा कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने 70 साल और उससे ज्यादा के लगभग 10,318 ऑस्ट्रेलिया लोगों पर यह शोध किया।
10 हजार कदम चलना जरूरी
सिडनी यूनिवर्सिटी और दक्षिणी डेनमार्क यूनिवर्सिटी के संयुक्त शोध के मुताबिक, रोजाना 10 हजार कदम चलने से डिमेंशिया का खतरा कम होता है। शोध में कहा गया कि इंसान जितना अधिक चलेगा उसकी याददाश्त उतनी मजबूत होगी। शोध में दैनिक कदमों की संख्या और डिमेंशिया के बीच लिंक पाया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष जामा न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किए गए हैं। शोध में ब्रिटेन के 78,500 वयस्कों को शामिल किया गया। इसमें 35,040 पुरुष और बाकी महिलाएं थीं। अध्ययन के दौरान आकस्मिक कदमों को ध्यान में रखा गया, जो 40 कदम प्रति मिनट से कम थे। इसमें पाया गया कि एक दिन में कम से कम 3,800 कदम चलने से डिमेंशिया का जोखिम करीब 25 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
