मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़,
रायपुर, छत्तीसगढ़
विशेष : सोसाइटी द्वारा धान खरीदी न रोकी जाए तथा बिना निर्वाचन के राजनैतिक ओआईसी को अतिशीघ्र हटाया जाए क्योंकि 01 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो रही है । यदि इन्हे नहीं हटाया गया तो निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।
नियम -उक्त शिकायत पत्र में छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 49 (8) का उल्लेख करते समय यह भी लिखना था कि राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग ऐसी स्थिति में सहकारी समितियों का निर्वाचन छः माह के भीतर एवं सहकारी बैंक का निर्वाचन अधिकतम एक वर्ष के भीतर कराने की वैधानिक अनिवार्यता होगी।
उपरोक्त विषयांतर्गत लेख है कि छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 2058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां पैक्स एवं लैंप्स) किसानों की सेवा में कार्यरत हैं । जिनके बोर्ड/ संचालक मंडल के कार्यकाल के अवसान के पूर्व निर्वाचन की प्रक्रिया गत वर्ष मई, जून 2022 तक संपन्न की जानी थी। किंतु निर्वाचन की प्रक्रिया नहीं कराकर बोर्ड के कार्यकाल के अवसान के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार पंजीयक सहकारी संस्थायें छत्तीसगढ़ द्वारा प्रथमतः सहकारी समितियों में सहकारिता विभाग एवं सहकारी बैंकों के कर्मचारियों, अधिकारियों एवं प्राधिकृत अधिकारियों के पद पर नियुक्त किया गया । तीन _चार माह बाद सत्ता पक्ष के कांग्रेस समर्थित अशासकीय व्यक्तियों / कांग्रेस के पदाधिकारियों को लगभग सभी समितियों में नामांकित बोर्ड के रूप में प्राधिकृत अधिकारी के पद पर नियुक्त कर दिया गया है जो आज पर्यंत पदस्थ हैं । चूंकि उक्त सभी कांग्रेस पदाधिकारी वर्तमान निर्वाचन के समय में अपने पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार प्रसार में लग गए हैं, ऐसी स्थिति में इससे आदर्श चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन हो रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 (य) (ट) का उदाहरण देना चाहूंगा जिसमें यह उल्लेखित किया गया है की “विधि में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड के चुनाव बोर्ड के कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व करा लिए जाएंगे यथा अनुच्छेद 243 (य) (ट) (1) में वर्णित है कि “राज्य की विधायिका द्वारा निर्मित किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड के चुनाव बोर्ड के कार्यकाल के समाप्त होने के पूर्व करा लिए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके की “बोर्ड का कार्यकाल” समाप्त होते ही नए निर्वाचित सदस्य अपना कार्य भार ग्रहण कर ले ।
इसी प्रकार छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम,1960 की धारा 50 ख(8)(क) में उल्लेखित है कि “निदेशक बोर्ड के सदस्यों का निर्वाचन निदेशक बोर्ड की पदावधि के अवसान होने के पूर्व किया जाएगा जिसमें निदेशक बोर्ड के नवीन निर्वाचित किए गए सदस्यों का बहिर्गामी निदेशक बोर्ड के सदस्यों की पदावधि के अवसान होते ही पद धारण करना सुनिश्चित किया जा सके।” किंतु निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ ना करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार लगभग सभी समितियों में छत्तीसगढ़ में सत्ता पक्ष के कांग्रेस समर्थित पदाधिकारीगण वर्तमान में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स एवं लैंप्स) में विधि विरुद्ध एवं असंवैधानिक रूप से नामांकित प्राधिकारी के रूप में नियुक्त किए गए हैं जो चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि सहकारी समितियों में किसानों की शेयर पूंजी लगी है। सहकारी समितियों में क्षेत्र के कृषकगण ही सदस्य होते हैं और वे ही चुनाव में भारी भूमिका निभाते हैं। अब जबकि 01 नवंबर से सोसाइटियों के माध्यम से ही प्रदेश के किसानों की धान खरीदी की जानी है। धान खरीदी के दौरान धान बेचने आए किसानों को, नामांकित अशासकीय प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा पार्टी का प्रचार प्रसार करने में अपने पार्टी के पक्ष में किसानों को मतदान करने प्रालोभन देकर चुनाव को प्रभावित किया जा सकता है। चूंकि सहकारी समितियों में किसानों की शेयर पूंजी लगी है। सोसाइटियों के माध्यम से कृषकगण केसीसी ऋण, मध्यम और दीर्घकालिक ऋण लेने, खाद और बीज लेने के लिए सहकारिता विभाग, सहकारी बैंक और सहकारी समितियों के कर्मचारियों, अधिकारियों के हमेशा सीधे संपर्क में रहते हैं। इससे नामांकित प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा, चुनाव को प्रभावित कर, सबसे बड़े आबादी वाले किसानों / मतदाताओं को पार्टी विशेष की ओर वोट देने, मतदान करने के लिए आकर्षित किया जा सकता है और बाध्य भी कर सकते हैं । चूंकि सोसाइटियों में नामांकित प्राधिकारीगण सत्ता पक्ष के कांग्रेस समर्थित सदस्य गण है जो वर्तमान में अपने पार्टी के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं जिससे आदर्श चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन हो रहा है। चुनाव की तारीख का ऐलान होने के बाद सभी राजनैतिक पार्टी के सदस्य गण अपने-अपने पार्टी के प्रचार-प्रसार में लग गए हैं, इसी प्रकार सहकारी समितियों में नियुक्त नामांकित बोर्ड के रूप में सत्ता पक्ष के कांग्रेस समर्थित प्राधिकृत अधिकारियों को तत्काल हटाने हेतु आदेश / निर्देश जारी करने का कष्ट करेंगे। चूंकि सहकारी समितियों, सहकारिता विभाग व सहकारी बैंकों के कर्मचारी, अधिकारीगण किसानों/मतदाताओं से सीधे संपर्क में रहते हैं अतः उन्हें प्राधिकृत अधिकारी के रूप में नियुक्त ना कर, शासकीय विभागों के अन्य कर्मचारियों, अधिकारियों को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त करने का आदेश/निर्देश प्रसारित करने का कष्ट करेंगे।
डॉ विजय शंकर मिश्रा
संयोजक
निर्वाचन आयोग संपर्क समिति,
भारतीय जनता पार्टी
