

जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज राजधानी रायपुर पहुंचे हैं। रायपुर के एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने लगातार राजनेताओं के द्वारा जातिगत जनगणना की बात को लेकर कहा है कि वह इसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना क्यों करना चाहिए? आज देश में एक धर्म की राजनीति कर रहा है तो दूसरा जाति की राजनीति। शंकराचार्य ने कहा कि धर्म को जाति से जोड़कर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
गौ माता को मिले राज्य माता का दर्जा
इसके साथ ही मीडिया से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा की वह मांग करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित करें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तो वहीं दूसरी तरफ अमृत जैसा दूध देने वाली हमारी गौ माता को काटा जा रहा है, यह एक बड़ी विडंबना है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि गाय को राज्य माता का दर्जा मिलना चाहिए।
धर्म और अधर्म की बताई परिभाषा
इसके अलावा उन्होंने कई मुद्दों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज राजनीतिक लोग धर्म का प्रयोग राजनीति के लिए कर रहे हैं। धर्म के इस्तेमाल से आज राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जहां वैमनस्य फैले, कटुता, विद्वेष फैले, अलगाव जारी हो इसका साफ तात्पर्य है कि वहां धर्म नहीं है। शंकराचार्य ने धर्म को सीमेंट की भांति बताया है। उन्होंने कहा कि धर्म तो सीमेंट है जो ईंटों को आपस में जोड़कर एक बनाने का काम करता है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो देश में विद्वेष फैल रहा है। यह मात्र धर्म के नाम पर अधर्म है।
ज्ञान व्यापी में पूजा पर बोले शंकराचार्य
ज्ञान व्यापी में पूजा शुरू होने पर शंकराचार्य ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस जगह पर जितनी ही व्यापियां है जहां-जहां हमारे साथ अत्याचार किया गया है, वहां-वहां हम एक बार फिर जाएंगे। इन सभी जगह पहुंचकर वहां पूजा अर्चना फिर से शुरू करेंगे, क्योकि यह देश के हिंदुओं का अधिकार है। शंकराचार्य ने कहा कि अगर हम पुराने स्थान को वापस ले रहे हैं तो इसमें कोई खराबी नहीं है।
