प्रश्न है.. क्या युवक की मौत के जिम्मेदार ये सभी नहीं है ? क्या ये लोग संबंधित अस्पताल को अपनी डिग्री और नाम देकर क्षेत्र की जनता को भ्रमित नहीं कर रहे ? क्या सरकार इन चिकित्सकों पर कार्यवाही करेगी ? स्वास्थ्य मंत्री सरकार के पास चिकित्सको की कमी की बात कहती है और डॉक्टर्स अपनी डिग्री और रजिस्ट्रेशन किराए पर चलाते है . बात गौर करने की है कि जिस अस्पताल के पास प्रापर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है , चिकित्सक नहीं है और न ही नर्सिंग स्टाफ है , जो नर्सिंग होम एक्ट का पालन नहीं करता उसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए मान्यता कैसे मिल गई?
शंका के घेरे में स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी…..
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