

अपील एवं खंडन
दिनांक: 18/01/2025
स्थान: रायपुर, छत्तीसगढ़
मैं, विराट वर्मा, संरक्षक, राष्ट्रीय अधिवक्ता स्वाभिमान सुरक्षा संगठन, आज इस मंच से आप सभी के समक्ष अपनी भावनाओं और विचारों को साझा करना चाहता हूँ। कल दिनांक 17/01/2025 को हमने Advocate Protection Act की माँग के लिए गवर्नर हाउस तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया।
हमारा कार्यक्रम शाम 4:45 बजे, नोटरी हॉल, जिला न्यायालय परिसर रायपुर से प्रारंभ होकर गवर्नर हाउस तक जाना प्रस्तावित था। परंतु, हमें संसद चौक पर ही रोक दिया गया। वहाँ हमने अपने एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन अधिवक्ता सम्माननीय सीनियर अधिवक्ता दिर्गेश शर्मा पर हुए हमले के विरोध में और वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु था।
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मनुस्मृति का दृष्टिकोण और मेरी जिम्मेदारी:
मनुस्मृति में न्याय और नेतृत्व की जिम्मेदारी को विस्तार से बताया गया है।
मनुस्मृति (7.144):
“प्रजानां रक्षणं दण्डं धर्मश्च शासनं च य:। स राजा धर्मसंचारी लोके धर्मेन युज्यते॥”
(अर्थ: राजा का धर्म है प्रजा की रक्षा करना, न्याय करना और धर्म का पालन करना।)
मनुस्मृति (8.35):
“नाभिशस्तस्य कुर्याच्च शस्तं धर्मेण पालयेत्। आत्मानं च परं चैव राज्यं चैव समं नयेत्॥”
(अर्थ: नेतृत्वकर्ता को अपने कर्मों और निर्णयों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। उसे अपने अधीनस्थों की रक्षा और उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए।)
इन सिद्धांतों के आधार पर, मैं यह मानता हूँ कि संरक्षक होने के नाते, इस संगठन में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या साजिश के लिए मैं नैतिक रूप से जिम्मेदार हूँ।
यदि हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कोई साजिश हुई हो, तो मैं इसे भी अपने कर्तव्य का हिस्सा मानते हुए नैतिक आधार पर स्वयं को उत्तरदायी मानता हूँ।
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घटना का विवरण:
कल दोपहर 3:00 बजे, जब मैं नोटरी हॉल परिसर पहुँचा, तो देखा कि अधिवक्तागण शांतिपूर्वक कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे। यह देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। मैंने सभी से आग्रह किया कि शाम 4:45 बजे निर्धारित कार्यक्रम में सम्मिलित हों और इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखें।
हमारा उद्देश्य था कि गवर्नर हाउस तक पहुँचकर ज्ञापन सौंपा जाए। लेकिन हमें संसद चौक पर ही रोक दिया गया, जहाँ हमने प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए कार्यक्रम को संपन्न किया।
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आशंका, साजिश और खंडन:
दुर्भाग्यवश, कुछ तत्वों ने इस कार्यक्रम को भंग करने और Advocate Protection Act की हमारी मांग को कमजोर करने की साजिश की।
उन्होंने जानबूझकर माहौल खराब करने का प्रयास किया।
इसके बाद, हमारे प्रिय जूनियर अधिवक्ताओं और इंटर्न्स पर हिंसा में शामिल होने के झूठे आरोप लगाए गए।
मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह आरोप पूर्णतः गलत और आधारहीन हैं।
यह साजिश न केवल हमारे प्रदर्शन को कमजोर करने का प्रयास है, बल्कि अधिवक्ता समुदाय की छवि धूमिल करने का भी प्रयास है।
मैं इन सभी आरोपों का खंडन करता हूँ और आप सभी से निवेदन करता हूँ कि इस मामले में सच्चाई को पहचाना जाए।
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हमारा उद्देश्य:
हमारा प्रदर्शन केवल Advocate Protection Act की माँग के लिए था, जिसमें वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कड़े प्रावधान हों:
1. अधिवक्ताओं, उनके परिवार, और संपत्ति की सुरक्षा।
2. अधिवक्ताओं के खिलाफ अपराध पंजीकरण से पहले राज्य बार काउंसिल की सहमति।
3. अधिवक्ता की मृत्यु पर ₹10,00,000 का बीमा और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों के लिए ₹5,00,000 का स्वास्थ्य बीमा।
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मेरा निवेदन:
मैं आप सभी से हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ:
कृपया जूनियर अधिवक्ताओं और इंटर्न्स को इस मामले में न घसीटा जाए।
यदि प्रशासन को दोषी ठहराना है, तो मैं स्वेच्छा से इसके लिए तैयार हूँ।
साथ ही, यह भी निवेदन करता हूँ कि प्रशासन इस बात की जाँच करे कि इस प्रदर्शन को भंग करने के लिए साजिश रची गई या नहीं।
अंत में, मैं महानुभाव मुख्यमंत्री महोदय और प्रशासन से निवेदन करता हूँ कि इस मामले में उचित निर्णय लें और निर्दोष जूनियर्स एवं इंटर्न्स को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाएँ।
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आपका विनम्र,
विराट वर्मा
संरक्षक, राष्ट्रीय अधिवक्ता स्वाभिमान सुरक्षा संगठन 🙏⚖️
