राजनांदगांव छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष पूर्व 20 से 40 के दशकों में
वनवासी आदिवासी राज्य क्षेत्र रायगढ़ में 1924 से 1947 तक छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़ा वर्ग क्षेत्र में कला संस्कृति व साहित्य की परवाह का केंद्र बिंदु रायगढ़ दरबार ही रहा है अपने पिता महाराज भूप देव सिंह जी से कला संस्कृति विरासत में प्रकार विलक्षण प्रतिभा के धनी राज्य चक्रधर सिंह संगीत और नित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है वैसे तो यह संगीत की तीनों विद्या गायन वादन और नित्य के ज्ञाता थे उन्होंने संगीत नृत्य और साहित्य को वह अपने इष्ट देव मानते थे और उन्होंने अपने दरबार को मां सरस्वती का पवित्र मंदिर मानते थे और राजा चक्रधर सिंह एक धर्मनिरपेक्ष राज्य थे और सभी धर्म का सम्मान करते थे महाराज चक्रधर सिंह संस्कृत हिंदी ब्रिज उर्दू और अंग्रेजी भाषा साहित्य के विद्वान थे नहीं बल्कि उच्च कोटि के रचनाकार भी थे और हिंदी के चक्र प्रिया के नाम से और उर्दू में फरहत के नाम से रचना करते थे उन्होंने चक्र प्रिया के नाम से ठुमरी भजन बंदिशें आदि अनेकों रचनाओं का भी सृजन किया
राजा साहब एक अच्छे कुशल तांडव नृत्य अंग के जानकार भी थे राज पद के कारण प्रदर्शन में भाग नहीं लेते थे और यही कारण है कि उन्होंने अनेकों नृत्य बंदिशें की रचना किया और रायगढ़ दरबार नित्य परंपरा को समृद्ध साली किया उन्होंने केवल बंदिशें की ही रचना नहीं की बल्कि कथक नृत्य के शस्त्र पक्ष को भी मजबूती प्रदान की और आदित्य जगत को नर्तन सर्वस्व व सूरजपन पुष्पकर नामक ग्रंथ की रचना कर विश्व पटेल में अपना नाम अंकित की और यह दोनों ग्रंथ कथक नृत्य का समृद्ध साली शास्त्र एवं प्रायोगिक पक्ष को मजबूती प्रदान किए हैं राजा साहब नृत्य के जानकारी होने के साथ-साथ वह संगीत गायन तबला पखावज के भी अच्छे जानकार थे और यही कारण है कि उन्होंने संगीत के लिए हजारों राज रागिनियो की रचना की बल्कि राज रतन मंजूषा ग्रंथ की रचना की और साथ ही लाल टॉय निधि ग्रंथ की रचना की लाल बाल पुष्पकर नमक तबला और पखावज के लिए उन्होंने लाल टॉय निधि ग्रंथ की रचना की जो की 32 किलो का वजनी ग्रंथ है
ज्ञात हो कि राजस्थान और लखनऊ जैसे वैभवशाली राजा और नवाबों के बाद छत्तीसगढ़ के वनवासी आदिवासी गोद दूरदर्शी महाराज चक्रधर सिंह ने संगीत नृत्य में संस्थागत शिक्षक प्रणाली के प्रयोग के साथ-साथ शास्त्र पक्ष को अपनी मजबूती से अपने ग में स्थान देकर उन्होंने सनातन संस्कृत संगीत नित्य और साहित्य की सृजन कर संगीतिक परंपरा को समृद्धि प्रदान करते हुए शिक्षक संरक्षण और सर्वधान कर कला जगत को अनुपम भेद किए इस प्रेस माध्यम से राजा चक्रधर सिंह जी के नाम से विगत 43 वर्षों से स्थापित मध्य भारत एवं छत्तीसगढ़ का प्रथम स्नातक संगीत महा विश्वविद्यालय चक्रधर कत्थक कल्याण केंद्र राजनांदगांव छत्तीसगढ़ के संस्थापक डॉक्टर कृष्ण कुमार सिंह अपील करते हैं कि राजा चक्रधर सिंह जी को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सम्मान देने हेतु भारत सरकार को अनुशंसा करने की आप सभी से सादर अपील करते हैं
