सरगुजा से बस्तर तक जैन विरासत का मुद्दा केंद्रीय मंत्री के समक्ष
सिरपुर की जैन धरोहर के लिए स्थायी समन्वय तंत्र व UNESCO दिशा में पहल की मांग
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की उपेक्षित जैन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण का महत्वपूर्ण मुद्दा आज नई दिल्ली में भारत सरकार के माननीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया। UNESCO Volunteer तथा महासचिव, जैन इंटरनेशनल फोरम प्रवीण प्रकाशचंद जैन ने, मंत्री जी से भेंट कर दो पृथक निवेदन सह ज्ञापन प्रस्तुत किए, जिन्हें मंत्री जी ने स्वीकार किया।
छत्तीसगढ़ के 108 वरिष्ठ जैन धर्मावलंबियों द्वारा अनुमोदीत दोनों महत्त्वपूर्ण ज्ञापनो के बारे में श्री प्रवीण प्रकाशचंद जैन ने बताया की
प्रथम में छत्तीसगढ़ के सरगुजा, मल्हार, सीताबेंगरा, आरंग, बकेला, नगपुरा, जगदलपुर, बस्तर, मदकू द्वीप तथा सिरपुर सहित विभिन्न स्थलों पर बिखरी जैन प्रतिमाओं, पुरातात्विक मूर्तियों, शिल्प-अवशेषों एवं विरासत-स्थलों के संरक्षण, विशेष सर्वेक्षण, वैज्ञानिक अभिलेखीकरण, 3D डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, संरक्षात्मक उपचार, सुरक्षा एवं सूचना-पट्ट स्थापना की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि छत्तीसगढ़ की जैन धरोहर केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत का अत्यंत मूल्यवान अध्याय है।
इस चर्चा का दूसरा ज्ञापन विशेष रूप से सिरपुर की जैन विरासत को केंद्र में रखकर दिया गया, जिसमें उसके पृथक सर्वेक्षण, सूचीकरण, संरक्षण, प्रस्तुतीकरण, समन्वित निधि-उपयोग तथा UNESCO World Heritage की दिशा में ठोस पहल की मांग की गई। साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि राष्ट्रीय एवं प्रदेशिक संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य संस्कृति विभाग, पर्यटन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के बीच एक स्थायी समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि संरक्षण एवं विकास कार्य बिखरे हुए न रहकर समयबद्ध रूप से आगे बढ़ सकें।
श्री जैन ने बताया की भेंट के दौरान मंत्री श्री शेखावत ने दोनों ज्ञापनों के बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से समन्वय स्थापित कर शीघ्र कार्यारंभ की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान मल्हार, सीताबेंगरा, जगदलपुर, बकेला, आरंग और मदकू द्वीप में जैन धरोहरों एवं पुरातन अवशेषों का अवलोकन कर संबंधित पक्षों के साथ समन्वित बैठक की पहल की जाएगी।
