छ.ग. राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ 08/04/2026
अशासकीय विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर जिला संगठन कार्यरत है। प्रदेश स्तर पर अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु प्रदेश के अधिंकांश जिला संगठनों ने मिलकर विगत वर्ष मई 2025 में प्रदेशव्यापी छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन किया तथा उसका पंजीयन करवाया ताकि इस पंजीकृत संस्था के माध्यम से अशासकीय विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं को शासन की समक्ष रखा जा सके।
विगत 8-9 वर्षों से अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सभी संगठन जिला स्तर पर लगातार शासन/प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराते रहे हैं तथा धरना, रैली,प्रदर्शन भी करते रहे हैं। प्रदेश स्तरीय संगठन तैयार होने के बाद हम अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार मुखर हैं।
RTE की प्रतिपूर्ति राशि का सत्र समापति के साथ ही समय पर भुगतान हो और पूरा भुगतान हो।
RTE की प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि हो प्राथमिक की 7000 को बढ़ाकर 15,000/, माध्यमिक की 11,400 को बढ़ाकर 18,000/- एवं हाइस्कूल की 15,000 को बढ़ाकर 25,000 किया जाय।
RTE में प्रवेश विद्यालय की बैठक संख्या का 25% हो न की विगत वर्ष की दर्ज संख्या के आधार पर।
RTE में प्रवेशित बच्चों को यूनिफार्म के लिए दिए जाने वाली राशि 541/- को बढ़ाकर 2000/- किया जाय।
RTE में प्रवेशित विद्यार्थियों को शासन की सरस्वती साइकिल योजना का लाभ दिया जाय।
RTE में प्रवेश नर्सरी / KG 1/class 1 जो भी विद्यालय की प्राथमिक कक्षा हो।
RTE अंतर्गत इस वर्ष सिर्फ क्लास 1 में ही प्रवेश हो रहा है जो कि गलत है। नर्सरी में भी साथ साथ प्रवेश होना चाहिए। साथ ही क्लास 1 में जो भी बड़ा RTE अंतर्गत चयनित हो वो विधिवत केजी 2 तक पढ़ाई किया हो इस विषय का अवश्य ध्यान रखा जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग का शैक्षणिक कैलेंडर शिक्षा सत्र के प्रारंभ में जारी हो और वर्ष भर उसी अनुसार सत्र संचालित होवार वार परिवर्तन करने से शैक्षणिक गुणवत्ता एवं विश्वनीयता दोनों प्रभावित होती है। उक्त कैलेंडर के निर्माण में अशासकीय विद्यालयों के संचालकों को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।
पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा प्रदान की जाने वाली नि:शुल्क पाठ्यपुस्तके के सत्र प्रारंभ होने के पूर्व संकुल स्तर पर पहुंचाकर दी जानी चाहिए। साथ ही NCERT की तरह पुस्तके खुले बाजार में सशुल्क भी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए ताकि सभी को पुस्तके समय पर उपलब्ध हो सके।
5 वीं एवं 8 वीं की बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों को फेल करने का प्रावधान लागू किया जाय ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनी जा सके।
अशासकीय विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को सरलीकृत कर एक साथ पांच वर्षों के लिए जारी की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल में द्वारा ऑनलाइन एंट्री में विलंब होने पर विद्यार्थियों से अत्यधिक विलंब शुल्क लिया जा रहा है जो न्याय संगत नहीं है। इस पर पुनर्विचार करके एक निश्चित राशि तय की जानी चाहिए।
शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों की तरह अशासकीय विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाओं को भी शासन द्वारा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए तथा D.ED एवं B.ED पाठ्यक्रम दूरवर्ती पद्धति से करवाया जाना चाहिए।
शैक्षणिक उपयोग में आ रही वनों की आयु को 17 साल तक फिटनेस जारी किया जाना चाहिए , जो कि अभी 12 साल ही में बंद कर दिया जाता है। साथ ही परमिट पूरे प्रदेश का जारी किया जाना चाहिए।
उपरोक्त समस्त विषयों को लेकर हमारा प्रदेश संगठन विगत एक वर्ष से प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णुदेव साय जी से कई बार मिल चुका है। माथौ ही के शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव जी से भी भेंट हुई है। लगातार संचालनालय के अधिकारियों से चर्चा चल रही है तथा सभी विषयों पर अभी तक सकारात्मक चर्चा हुई है। हमे विश्वास है जिस प्रकार से प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री ने गंभीरता से हमारे विषयों को सुना हमे पूर्ण विश्वास है हमारी समस्याओं का शीघ्र निराकरण होगा।
विगत कुछ माह से समाचार पत्रों के माध्यम से हमे जानकारी मिलती है कि एक कॉरपोरेट समूह द्वारा प्राइवेट स्कूलों के नाम से लगातार भ्रामक विज्ञप्ति एवं समाचार जारी किया जा रहा है। उक्त कॉरपोरेट समूह द्वारा प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तक चलाने अनर्गल बयान देते हो कभी 5 वीं 8 वीं बोर्ड को रुकवाने एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं। यहां तक कि बार बार ये कॉरपोरेट समूह हाईकोर्ट का भी रुख करता है। अभी हाल ही में इन्होंने शासन को बोर्ड परीक्षा कार्य हेतु बस नहीं देने, पोर्टल में एंट्री नहीं करने,किसी प्रकार का शासन का शासकीय कार्य में सहयोग नहीं करने जैसे बयान देकर अशासकीय विद्यालयों की छवि को प्रभावित करने का कार्य किया है। हद तो तब हो गई ये कॉरपोरेट घराना RTE अंतर्गत कोई निजी विद्यालय प्रवेश नहीं देगा जैसी घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके करते हैं।
उनके इस कृत्य से पूरे प्रदेश में अशासकीय विद्यालयों की छवि धूमिल हो रही है। उक्त कॉरपोरेट समूह द्वारा लगातार जनता की नजर में अशासकीय विद्यालयों को खलनायक के रूप में चित्रित किया जा रहा है।
हमारा संगठन उक्त कॉरपोरेट का विरोध करता है तथा इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से स्पष्ट करता है कि प्रदेश में महा अशासकीय विद्यालय (कॉरपोरेट को छोड़कर) भारत एवं छत्तीसगढ़ सरकार एवं सभी नियमों का अक्षरश: पालन करेंगे।
हम विद्यालय सेवा के लिए चलाते हैं न कि व्यवसाय के लिए कृपया प्रदेश से अशासकीय विद्यालयों की तुलना इन कॉरपोरेट स्कूलों से न की जाए!
हमने कभी भी ऐसा निर्णय नहीं लिया है कि हम RTE में प्रवेश नहीं देंगे बल्कि हमने तो कहा है नर्सरी में भी प्रवेश प्रक्रिया पुनः प्रारंभ होना चाहिए। ये कॉरपोरेट जगत अपने व्यवसायिक स्वार्थ के लिए RTE जैसी महत्वपूर्ण योजना को बंद करवाने सब प्रकार का पडयंत्र विगत अनेक वर्षों से कर रहा है।
बड़ी संख्या में नेता, उच्च अधिकारी एवं उद्योगपतियों के बच्चे ऐसे कॉरपोरेट समूह के स्कूलों में पढ़ते हैं अतः उन्हें ये वार वार जनता को ब्लैकमेल करने का काम करते हैं इसलिए ये बार बार शासन प्रशासन उनके जेब में होते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ स्पष्ट करता है कि कॉरपोरेट स्कूलों द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के किसी भी कृत्य का प्रदेश के समस्त अशासकीय विद्यालय समर्थन नहीं करते हैं तथा शासन से मांग करते हैं कि गलत कार्य करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए ताकि शिक्षा जैसे क्षेत्र को कलंकित करने वाले जनता के सामने बेपर्दा हो सके।
धन्यवाद
वन्देमातरम
सुबोध राठी
प्रदेश अध्यक्ष
मनोज पाण्डेय
प्रदेश सचिव
