

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की संवेदनशील पहल और निरंतर प्रयासों से गंभीर बीमारी से जूझ रही एक बालिका के जीवन में नई उम्मीद जगी है। जिस बालिका का शरीर धीरे-धीरे पत्थर जैसा होता जा रहा था और जिसकी स्थिति बेहद गंभीर थी, उसके स्वास्थ्य में एम्स रायपुर में उपचार के बाद अब लगभग 80 प्रतिशत तक सुधार हुआ है।
बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने के बाद अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसके बेहतर उपचार के लिए आवश्यक पहल की। उन्होंने दंतेवाड़ा कलेक्टर से चर्चा कर बालिका के उपचार, देखभाल और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया। अध्यक्ष डॉ. शर्मा की पहल पर दंतेवाड़ा कलेक्टर द्वारा बालिका की देखभाल एवं आवश्यक समन्वय के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया और बालिका को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित किया। इसके पश्चात बालिका को बेहतर एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एम्स रायपुर में उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बालिका की गंभीर स्थिति को देखते हुए लगातार उपचार, जांच एवं आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की।
एम्स रायपुर में त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली तथा डॉ. नम्रता छाबड़ा सहित बहुविषयक चिकित्सा टीम ने बालिका की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया तथा उसकी आवश्यकता के अनुरूप चरणबद्ध उपचार योजना तैयार की। उपचार के दौरान त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ-साथ बालिका के समग्र स्वास्थ्य, पोषण, संक्रमण की रोकथाम तथा अन्य संबंधित चिकित्सकीय पहलुओं पर भी निरंतर ध्यान दिया गया।
एम्स के चिकित्सकों के अथक प्रयास, दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग तथा अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की सतत पहल और निगरानी के परिणामस्वरूप बालिका के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सकारात्मक बदलाव आया है। वर्तमान में उसके स्वास्थ्य में लगभग 80 प्रतिशत सुधार हो चुका है, जो उसके परिजनों और उपचार से जुड़े सभी लोगों के लिए बेहद उत्साहजनक है।
अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। इस बालिका के उपचार में एम्स के चिकित्सकों ने जिस समर्पण और अथक प्रयास के साथ कार्य किया है, वह अत्यंत सराहनीय है। दंतेवाड़ा कलेक्टर एवं जिला प्रशासन द्वारा भी बालिका की देखभाल के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर संवेदनशीलता के साथ सहयोग किया गया। बालिका के स्वास्थ्य में 80 प्रतिशत सुधार हम सभी के लिए बेहद संतोषजनक और उत्साहजनक है। हमारा प्रयास है कि वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौटे और उसके चेहरे की मुस्कान हमेशा बनी रहे।
बालिका के स्वास्थ्य में आए इस सकारात्मक बदलाव से उसके परिजनों एवं उसकी देखभाल कर रहे लोगों में खुशी का माहौल है। गंभीर बीमारी से जूझ रही इस बालिका के स्वास्थ्य में आया यह सुधार न केवल उसके परिवार के लिए राहत और खुशी का विषय है, बल्कि यह इस बात की भी मिसाल है कि संवेदनशील पहल, समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा, प्रशासनिक सहयोग और निरंतर प्रयासों से मुश्किल परिस्थितियों में भी उम्मीद की नई राह बनाई जा सकती है।
