

रायपुर. स्कूल के दिनों में आदरणीय कुमुदनी वैष्णव मैडम केमिस्ट्री पढ़ाया करती थीं, अणु-परमाणु की उनकी क्लास और Periodic Table याद करने का होम-वर्क तब बहुत कठिन लगता था लेकिन कुमुदनी मैडम ने हमेशा ही मुझे प्रोत्साहित करते हुए कठिन से कठिन प्रश्नों को सरलता से समझाया।
बहुत लंबे समय के बाद उनके साथ मिलना हुआ तो पुरानी स्मृतियाँ सामने आ गई, हिंदी के अध्यापक “झा सर” जो व्याकरण की शुद्धता पर जोर देते थे और फिजिक्स के अध्यापक “श्याम सुंदर चटर्जी सर” जिन्होंने प्रैक्टिकल ढंग से गुरुत्वाकर्षण सिखाया था। कुमुदनी मैडम के साथ ऐसे सभी प्रसंगों पर बहुत सुखद संवाद हुआ।
आप सभी अध्यापकों के परिश्रम और मार्गदर्शन से ही क्लास में लकड़ी की मेज पर बैठा “रमन” आगे बढ़कर “डॉ रमन” बन पाया है। आज #शिक्षक_दिवस पर मैं बड़े भावुक मन से अपने सभी अध्यापकों को शीश झुका कर नमन करता हूँ।
