उपरोक्त विषयान्तर्गत लेख है कि लगभग 2900 बी.एड. प्रशिक्षित सहायक शिक्षक विगत 14 माह से सरगुजा तथा बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
उक्त सभी अभ्यर्थी NCTE (2018) के गजट, छत्तीसगढ़ के राजपत्र तथा शिक्षा-विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में उच्चकोटि के अंक प्राप्त कर नियमतः नियुक्त हुए हैं। नीति-निर्माताओं की चूक तथा विधिक नियमों में अप्रत्याशित परिवर्तन की वजह से इन 2900 युवाओं पर पदमुक्ति का संकट मंडरा रहा है।
दिनाँक 10 दिसम्बर 2024
की सुनवाई में माननीय उच्च न्यायालय
(बिलासपुर)
ने लोक शिक्षण संचालनालय को दो
सप्ताह के भीतर इन चयनित बी.एड. प्रशिक्षितों के स्थान पर डी.एड. प्रशिक्षितों की नियुक्ति देने का आदेश दे दिया है।
श्रीमान, इन बी.एड. प्रशिक्षित चयनितों में से सैकड़ों अभ्यर्थी अपनी पूर्व की सरकारी तथा संविदा नौकरी से त्यागपत्र देकर सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए हैं। इनमें कुछ दिव्यांग तथा भूतपूर्व सैनिक कोटा से भी हैं। इस नौकरी के आधार पर कई अभ्यर्थी विवाह सूत्र में बंध चुके हैं, अधिकांश ने लोन ले रखा है। विगत 14 माह से ये नवनियुक्त अपनी जमापूँजी लगाकर न्यायालय की लड़ाई लड़ रहे थे तथा अब सरकार से सेवा सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं। ये 2900 व्यक्ति नहीं वरन् 2900 परिवार हैं।
उक्त अभ्यर्थी बी.एड., स्नातक/स्नाकोत्तर, टी.ई.टी. की योग्यता रखते हैं। भर्ती परीक्षा में चयनित होकर इन्होंने अपनी पात्रता का प्रमाण दिया है। केवल परीक्षा के उपरांत नियमों में बदलाव की वजह से इन्हें बाहर किया जा रहा है। नीतिगत ग़लतियों की सज़ा मेहनकश निर्दोष युवाओं को भुगतनी पड़ रही है। जबकि राज्य में शिक्षा विभाग के हज़ारों पद रिक्त हैं, इन चयनितों को इनकी योग्यता के अनुसार विभाग में समायोजित किया जा सकता है। अतः हम सभी सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन धरना स्थल तूता मैदान में 19/12/24 से 21/12/ 24 तक कर रहे हैं।
अतः श्रीमान की करुण-प्रकृति से निवेदन है कि इन उत्पीड़ितों की मानसिक दशा, आजीविका संकट तथा सामाजिक प्रतिष्ठा पर पहुँचे आघात को संज्ञान में लेकर विधिक तथा प्रशासनिक युक्तियों से इन निर्दोष सहायक शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित रखने हमारे इस आंदोलन को स्थान प्रदान करने की महती कृपा करें।
